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बच्चे भी देंगे नसीहतें सोचा न था कभी……..कोरोना काल (corona time)में हकीकत बयां करती शिक्षक नीरज पंत की ग़ज़ल

corona time

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ग़ज़ल

कटेगी यूं जिंदगी अपनी सोचा न था कभी ।
बच्चे भी देंगे नसीहतें सोचा न था कभी ।

कितने पास हैं हम फिर भी दूर कितने ,
ये रिश्ते हैं मजबूर कितने सोचा न था कभी ।
 
जो न आये घर  कभी अब वे घर पे हैं ,     सूना आंगन यूं बाग बाग सोचा न था कभी ।

मिलाने आंख सूरज से मैं चला था ,
होगी दिन में रात  सोचा न था कभी ।

थम गई जो जिंदगी होगी फिर आबाद ,
बेनूर दिल में भी आस सोचा न था कभी ।
                                       ” नीरज”