shishu-mandir

मिलेट्स खाद्य प्रसंस्करण पर प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ संपन्न,हिमालयन मिलेट्स ब्रांड नाम से बाजार में आएंगे बुंगाछीना के पोषक अनाज

Newsdesk Uttranews
5 Min Read
Screenshot-5

मिलेट्स खाद्य प्रसंस्करण पर प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ संपन्न,हिमालयन मिलेट्स ब्रांड नाम से बाजार में आएंगे बुंगाछीना के पोषक अनाज

new-modern
gyan-vigyan
पिथौरागढ़। मिलेट्स के उप उत्पाद तैयार करने और बाजार में उतारने को लेकर पर्वतीय महिला कल्याण समिति के तत्वावधान में महिला उद्यमियों के लिए आयोजित छह दिवसीय प्रशिक्षण का रविवार को समापन हो गया। बुंगाछीना स्थित ग्राम पंचायत अगन्या के पंचायत घर में आयोजित प्रशिक्षण के समापन अवसर पर आयोजक संस्था के प्रतिनिधियों और महिला उद्यमियों ने बुंगाछीना घाटी के मिलेट्स एवं उप उत्पादों को ‘हिमालयन मिलेट्स’ ब्रांड नाम के साथ बाजार में उतारने की घोषणा की। मिलेट्स आधारित इस प्रशिक्षण में बुंगाछीना की करीब 30 महिलाओं ने प्रतिभाग किया। 
समापन अवसर पर कार्यक्रम संयोजक कुंडल सिंह चौहान ने कहा कि मौजूदा दौर में मिलेट्स की बाजार में बेतहाशा मांग है और इन पोषक अनाजों के उप उत्पादों को उपभोक्ता हाथोंहाथ ले रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मिलेट्स आधारित छह दिवसीय खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। हालांकि प्रशिक्षण केवल 20 महिलाओं को दियाा जाना था, लेकिन महिला उद्यमियों के अत्यधिक उत्साहित होने के कारण प्रशिक्षण लगभग 30 महिलाओं को दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान महिला उद्यमियों ने ‘रेडी टू कुक’ और ‘रेडी टू ईट’ प्रोडेक्ट्स तैयार करने का हुनर सीखा। जिसके तहत मडुवा, झिंगोरा, चौलाई, कौनी, काला भट्ट, मक्का आदि अनाजों के मूल्यवर्धित उप उत्पाद महिला उद्यमियों द्वारा तैयार किए गए। तैयार उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग का हुनर भी प्रशिक्षण में महिलाओं ने सीखा। 

प्रतिभागी महिलाओं ने कहा कि वे मोटे आनाजों को सीधे बाजार में बेचने के अलावा उप उत्पादों को बाजार देने का कार्य करेंगी, जिससे उनकी आय में इजाफा हो सके। महिलाओं का मानना था कि उनकी ग्राम पंचायत अगन्या में यदि राज्य सरकार उप उत्पाद तैयार करने की छोटी युनिट स्थापित करती है तो उनको उत्पादन में आसानी होगी।

saraswati-bal-vidya-niketan

इस अवसर पर मुख्य प्रशिक्षक गोविंद बिष्ट ने महिलाओं को नमकीन, पोहा, ओट्स व
बिस्कुट आदि के साथ ही मिलेट्स की मिठाई और व्यंजन बनाने की बारीकियां सिखाई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौराना प्रोफेसर डी.एस चौहान ने कहा कि मिलेट्स पर आधारित जैव विविधता का संरक्षण करना रोजगार को प्रोत्साहित करना है। वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा ‘अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष’ के अवसर पर मोटे अनाजों के संरक्षण की दिशा में गंभीर प्रयास करने होंगे। अन्यथा मोटे अनाजों की प्रजातियां संकट में पड़ जाएंगी, जिन्हें वापस लाना संभव नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण आज पृथ्वी की जैव विविधता संकट का सामना कर रही है। मोटे और पोषक अनाजों की प्रजातियां भी इस संकट से बच नहीं पाई हैं। हिमालयी क्षेत्र में उगाई जाने वाली धान की कई प्रजातियां लुप्त हो गई हैं और कई पर संकट मंडरा रहा है। पर्वतीय क्षेत्र में किसानों ने हरित क्रांति के बाद जौं, चौलाई, कौनी, बाजरा जैसे पोषक अनाजों की खेती करना बंद कर दिया है। जिससे इन फसलों की हिमालयन प्रजाातियों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है।


ग्राम प्रधान अगन्या बसंत बल्लभ शर्मा ने कहा कि स्थानीय संसाधनों के प्रबंधन की दिशा में पर्वतीय महिला कल्याण समिति का यह प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग्राम पंचायत के लगभग 100 परिवार मिलेट्स की खेती कर रहे हैं। चालू वर्ष में आयोजन संस्था ने ग्राम पंचायत की लगभग 10 हेक्टेयर भूमि में मोटे अनाजों की खेती प्रोत्साहित की है। जिसके बेहतर नजीते आने की संभावना है। क्षेत्र के गणमान्य नागरिक जगदीश चौहान ने पोषक अनाजों को बढ़ावा देने की इस पहल को सराहनीय बताया। कहा कि इससे क्षेत्र के किसानों को मिलेट्स की खेती के लिए काफी प्रेरणा मिलेगी।


पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य उमाकांत शर्मा ने कहा कि मोटे अनाजों के उप उत्पाद बनाने को लेकर क्षेत्र की महिलाओं में अत्यधिक उत्साह है। इसमें सरकार का सहयोग भी अपेक्षित है।
गौरतलब है कि पर्वतीय महिला कल्याण समिति, जीबी पंत राष्ट्रीय पर्यावरण संस्थान के सहयोग से बुंगाछीना क्षेत्र के छह गांवों में मिलेट्स पर केंद्रित परियोजना का संचालन कर रही है। क्षेत्र की सौ से अधिक महिला काश्तकारों ने लगभग 500 नाली भूमि में मिलेट्स की खेती की पहल की है। संचालक संस्था ने महिलाओं को निःशुल्क बीज उपलब्ध कराए हैं, उम्मीद है कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिलेट्स का उत्पादन होगा। प्रशिक्षण में ग्राम अगन्या, बुंगा व बुंगाछीना, आटा, ओली गांव व खुलेती की महिलाओं ने प्रतिभाग किया। इस मौके पर ‘पोषक अनाजों के पौष्टिक व्यंजन’ शीर्षक के साथ प्रकाशित पुस्तिका का लोकार्पण भी किया गया।