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इंटरनेट इतिहास का सबसे बड़ा साइबर लीक: एपल, गूगल, फेसबुक समेत अरबों यूजर्स की लॉगइन डिटेल्स उजागर

इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब इतने बड़े पैमाने पर इंटरनेट यूजर्स की निजी जानकारियां एक साथ लीक हो गई हैं। दुनिया की…

इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब इतने बड़े पैमाने पर इंटरनेट यूजर्स की निजी जानकारियां एक साथ लीक हो गई हैं। दुनिया की दिग्गज कंपनियों में शामिल एपल। फेसबुक। गूगल से लेकर टेलीग्राम और कई सरकारी सेवाओं तक के खातों की लॉगइन डिटेल्स अब खुलेआम डार्क वेब पर देखी जा सकती हैं। बताया जा रहा है कि इस लीक में करीब सोलह अरब पासवर्ड और यूजरनेम शामिल हैं। जो अलग अलग प्लेटफॉर्म के हैं। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार का लीक अब तक के सभी मामलों से बहुत बड़ा और खतरनाक है। इससे पहले मई में करीब अठारह करोड़ पासवर्ड लीक होने का मामला सामने आया था। लेकिन अब का मामला उससे कई गुना ज्यादा बड़ा है।

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साइबर सुरक्षा से जुड़े शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तरह का काम किसी एक हैकर का नहीं। बल्कि कई साइबर गिरोहों की मिलीभगत का नतीजा है। साइबरन्यूज से जुड़े विशेषज्ञ विलियस पेटकॉस्कस ने बताया कि लगभग तीस अलग अलग डाटासेट लीक हुए हैं। और हर एक में तीन अरब से ज्यादा रिकॉर्ड हैं। उन्होंने बताया कि इनमें सोशल मीडिया साइट्स। वीपीएन। डेवलपर पोर्टल्स और कई सरकारी खातों की लॉगइन जानकारियां शामिल हैं। इस लीक के जरिए साइबर अपराधी लोगों के बैंक अकाउंट से लेकर उनकी निजी जिंदगी तक में घुसपैठ कर सकते हैं। क्योंकि ज्यादातर डेटा यूआरएल। यूजरनेम और पासवर्ड के फॉर्मेट में उपलब्ध है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बड़े पैमाने पर दुरुपयोग की एक पूरी योजना जैसी तस्वीर पेश करता है।

इस डाटा को किस तरह से चुराया गया। इसे लेकर विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इनफोस्टीलिंग मैलवेयर के जरिए यह जानकारियां चोरी की गई हैं। ये ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं जो किसी भी सिस्टम से संवेदनशील जानकारी चुरा लेते हैं। फिर साइबर अपराधी इन जानकारियों को डार्क वेब पर बेचते हैं। शोधकर्ताओं ने उस होस्टिंग प्रोवाइडर से भी संपर्क किया है। जो करोड़ों पासवर्ड को टेक्स्ट फाइल के रूप में स्टोर कर रहा था। दावा किया जा रहा है कि हर कुछ हफ्तों में नए और बड़े डाटासेट सामने आते हैं। जो यह साबित करते हैं कि इनफोस्टीलर मैलवेयर कितने खतरनाक हो चुके हैं। हालांकि इनमें बहुत सी जानकारियां एक जैसी भी हो सकती हैं। जिससे प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या तय करना मुश्किल है। लेकिन यह माना जा रहा है कि करीब 5.5 अरब इंटरनेट यूजर्स में से आधे से ज्यादा लोग इस लीक की चपेट में आ सकते हैं।