Amritpal Arrested — पंजाब के मोगा शहर से पकड़ा गया अमृतपाल,इन 9 राज्यों में हो रही थी तलाश, कैसे आया गिरफ्त में, कैसे हुआ सरेंडर

Newsdesk Uttranews
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खालिस्तान समर्थक और वारिस दे पंजाब चीफ amritpal को लेकर सस्पेंस अब खत्म हो गया है। बताया जा रहा है कि अमृतपाल ने सरेंडर किया है। 36 दिन से जिस अमृतपाल की खोज में पंजाब सहित 9 राज्यों की पुलिस जुटी थी, वह पंजाब के मोगा शहर के गुरूद्वारा में मिला।


36 दिन तक पुलिस को छकाने के बाद आखिरकार amritpal पुलिस की गिरफ्त में आ ही गया। अब पुलिस उसे लेकर आसाम के डिब्रूगढ़ ले जाने की तैयारी में है।
खालिस्तान समर्थक अमृतपाल की खोजबीन पंजाब,हरियाणा,राजस्थान उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में हो रही थी।पुलिस ने रविवार की सुबह उसे मोगा के पास गुरुद्वारा से सरेंडर करने के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को उसकी सरगर्मी से तलाश थी और करीब 36 बदन बाद पुलिस ने अमृतपाल सिंह को सरेंडर करने के बाद गिरफ्तार कर लिया।


Amritpal Arrested —समर्थकों और करीबी लोगों पर पुलिस रख रही थी निगरानी
पुलिस 36 दिनों से अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) की तलाश में थी। अमृतपाल के ऊपर एनएसए लगाया गया। इसके साथ ही उसकी तलाश कि लिए समर्थकों और करीबों लोगों की निगरानी की गई लेकिन उसका कही पता नही चल रहा था। पंजाब के अलावा हरियाणा,राजस्थान उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के अलावा भारत से लगी अंतराष्ट्रीय सीमाओं पर भी उसकी तलाश की गई। पुलिस ने उसकी तलाश करने के साथ ही समर्थकों और करीबियों पर शिकंजा कसा, लेकिन उसका पता नही चला।


मोगा के इस गांव के गुरूद्वारा से सरेंडर के बाद पकड़ा गया अमृतपाल
अमृतपाल सिंह ने मोगा के रोड़े गांव के गुरुद्वारा में सरेंडर किया।बताया जा रहा है कि सरेंडर करने से पहले अमृतपाल सिंह ने गुरुद्वारा साहिब से संबोधित किया था। जिस गांव से अमृतपाल सिंह को पकड़ा गया वह यह जरनैल सिंह भिंडरावाला का गांव है। बताया जा रहा है कि यही अमृतपाल की दस्तारबंदी हुई थी। अमृतपाल सिंह ने कहा कि उसके जैसे लोग आते जाते रहेंगे, उसने युवाओं से नशा छोड़ने और अमृत ग्रहण करने को कहा।


कब क्या क्या हुआ,कैसे किया अमृतपाल (Amritpal Singh) ने सरेंडर
19 मार्च को अमृतपाल सिंह के चाचा की हुई थी गिरफ्तारी
खालिस्तान समर्थक और वारिस दे पंजाब चीफ अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh)
की तलाश में उसके घर परिवार,करीबियों और समर्थकों पर ​पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू किया और पुलिस के दबाब के बाद अमृतपाल के चाचा और ड्राइवर ने जालंधर देहात के महितपुर इलाके में 19 मार्च को आत्मसमर्पण किया। बाद में उसके चाचा को असम भेज दिया गया।


Amritpal Arrested- कानूनी कार्रवाई, फाइनेंसर की गिरफ्तारी से पुलिस ने कमजोर किया नेटवर्क


वारिस दे पंजाब चीफ और खालिस्तानी अमृतपाल (Amritpal Singh) की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उसे आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए उसके फाइनेंसर की गिरफ्तारी की। इसके साथ ही अमृतपाल को भगोड़ा घोषित कर दिया और अमृतपाल पर 19 मार्च को 3 और एफआईआर दर्ज कर दी। अमृतपाल के फाइनेंसर दलजीत सिंह कलसी और उसके गनरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर उसे आर्थिक रूप से कमजोर करने का प्रयास किया।साथ ही यह संदेश भी गया कि अगर कोई अमृतपाल की मदद करेगा तो वह पुलिस की गिरफ्त में आ सकता है।


कभी यूपी के पीलीभीत तो कभी काला बांगा में छिपने की आई खबरें
अमृतपाल (Amritpal Singh) की तलाश हो रही थी और उसके बारे में अफवाहें भी जोरों पर थी। उसके कभी यूपी के पीलीभीत तो कभी काला बांगा में छिपने की बात सुनाई दी। कभी उसे उत्तराखण्ड में दिखाई देने की अफवाह चलती तो कभी पंजाब में। सकभी राजस्थान के काला बांगा में तो कभी उत्तराखंड के पीलीभीत में छिपा बताया गया। पुलिस को सूचना मिली कि अमृतपाल पंजाब जालंधर के शाहकोट में है। लेकिन घेराबंदी के बावजूद अमृतपाल बाइक पर भागने में सफल रहा। होशियारपुर में भी उसके दिखने के बाद वह यहां से भागने में सफल रहा।


29 मार्च को जारी किया एक वीडियो,सशर्त आत्मसमर्पण की कही थी बात
29 मार्च को अमृतपाल ने एक वीडियो जारी किया था। वीडियो में अमृतपाल ने कहा कि वह सुरक्षित और पुलिस की नजरों से बच निकला है। उसने कहा कि वह सशर्त आत्मसमर्पण करेगा।


उसके आत्मसमर्पण की बात कहने के बाद पुलिस ने अपने सूत्रों से अनुमान लगाया कि वीडियों में कहे अनुसार सरबत खालसा बुलाने के पीछे अमृतपाल किसी बड़े गुरूद्वारे में आत्मसमर्पण की योजना बना रहा है। इसके बाद पुलिस ने वैसाखी पर्व पर पंजाब के सभी गुरूद्वारों में सुरक्षा कड़ी करते हुए बैरिकेडिंग कर दी थी। लेकिन अमृतपाल पकड़ में नही आ सका।


खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल को लेकर पुलिस पर था नरमी बरतने का आरोप
कई दिनों से पुलिस और वारिस दे पंजाब चीफ अमृतपाल के बीच चूहे बिल्ली का खेल चलता रहा। इसको लेकर पुलिस पर भी लोग सवाल खड़े कर रहे थे।सिख नेताओं ने यहां तक आरोप लगाया था कि यह सब एक राजनीतिक सांठगांठ का नतीजा है। इसके साथ ही पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी पंजाब पुलिस की असफलता पर सवाल उठाए थे।