अल्मोड़ा:: खत्याड़ी में तीन दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

अल्मोड़ा, 8 फरवरी 2025 – हिमगिरी नेचुरल प्रोडक्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी खत्याड़ी लिमिटेड द्वारा गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान, कोसी कटारमल के सहयोग से…

अल्मोड़ा, 8 फरवरी 2025 – हिमगिरी नेचुरल प्रोडक्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी खत्याड़ी लिमिटेड द्वारा गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान, कोसी कटारमल के सहयोग से ग्राम खत्याड़ी पहल, तलाड़ में तीन दिवसीय मशरूम उत्पादन एवं मशरूम से बनने वाले विभिन्न उत्पादों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण 8 फरवरी 2025 से 10 फरवरी 2025 तक चलेगा।

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इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के किसानों को मशरूम उत्पादन की उन्नत तकनीकों से परिचित कराना और उनकी आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम उठाना है। प्रशिक्षण के दौरान कृषकों को बटन मशरूम और ढींगरी मशरूम की खेती की वैज्ञानिक जानकारी दी जा रही है।

कार्यक्रम में तीलू रौतेली पुरस्कार विजेता एवं मशरूम कल्टीवेशन विशेषज्ञ प्रीति भंडारी बतौर प्रशिक्षक शामिल हैं। उन्होंने पहले ही दिन किसानों को मशरूम उत्पादन की बुनियादी तकनीकों, जलवायु अनुकूलन, खाद तैयार करने की प्रक्रिया और मशरूम के सही विकास के लिए आवश्यक सावधानियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन एक कम लागत और अधिक लाभ वाला व्यवसाय है, जिससे किसान अपनी आजीविका में वृद्धि कर सकते हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

ग्राम खत्याड़ी और तलाड़ क्षेत्र में कृषि आधारित आजीविका प्रमुख है, लेकिन बदलते मौसम और पारंपरिक खेती से होने वाले सीमित लाभ के कारण किसान अन्य आय के स्रोतों की तलाश कर रहे हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से उन्हें मशरूम उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय का जरिया मिलेगा। मशरूम की बढ़ती मांग को देखते हुए यह व्यवसाय स्थानीय बाजारों के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संभावनाओं से भरपूर है।

प्रशिक्षण के प्रमुख बिंदु:

बटन और ढींगरी मशरूम की खेती की तकनीक
बीज उत्पादन एवं रखरखाव की प्रक्रिया
मशरूम से बनने वाले मूल्य संवर्धित उत्पाद
मार्केटिंग और बिक्री की संभावनाएं

किसानों ने इस प्रशिक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लिया और इसे अपने भविष्य के लिए सकारात्मक पहल बताया। प्रशिक्षकों ने भी ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को मशरूम व्यवसाय से जुड़ने की प्रेरणा दी।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषकों की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, जिससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ेगी बल्कि जैविक उत्पादों को बढ़ावा मिलने से पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।