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अजगर के खून में मिला अनोखा अणु, वैज्ञानिक बोले: मोटापा घटाने में बन सकता है नया कारगर तरीका

मोटापा आज दुनिया के सामने तेजी से बढ़ती चुनौती बनकर उभर रहा है। इसी कारण वैज्ञानिक लगातार नए समाधानों की तलाश में जुटे हैं। हाल…

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मोटापा आज दुनिया के सामने तेजी से बढ़ती चुनौती बनकर उभर रहा है। इसी कारण वैज्ञानिक लगातार नए समाधानों की तलाश में जुटे हैं। हाल ही में हुई एक दिलचस्प रिसर्च में बर्मी अजगर के खून में ऐसा अनोखा अणु मिला है, जो भविष्य में वजन घटाने की बेहद प्रभावी दवा साबित हो सकता है। यह अध्ययन मोटापे से लड़ाई में एक नई दिशा दिखाता है और भूख नियंत्रित करने के बिल्कुल अलग तरीके की ओर इशारा करता है।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि अजगर अपनी अनोखी भोजन आदतों के लिए जाने जाते हैं। वे अपने वजन जितना भारी शिकार निगल जाते हैं और फिर लंबे समय तक बिना भोजन के जीवित रह लेते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि भोजन करने के बाद अजगर के खून में कुछ विशेष अणु तेजी से बढ़ जाते हैं, जो उनके असामान्य मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में जोनाथन लॉन्ग की टीम ने युवा अजगरों के भोजन से पहले और बाद के रक्त नमूनों का अध्ययन किया। इसमें 200 से ज्यादा ऐसे अणु मिले जिनकी मात्रा में तेज उछाल देखा गया। इनमें pTOS नामक अणु सबसे खास रहा, जिसकी मात्रा 1,000 गुना तक बढ़ी। यह अणु आंतों के बैक्टीरिया से बनता है और इंसानों में भी बहुत कम मात्रा में मौजूद रहता है। जब मोटे चूहों को pTOS दिया गया तो उन्होंने कम भोजन किया और 28 दिनों में करीब 9% वजन कम कर लिया।

रिसर्च टीम का दावा है कि यह संभावित दवा मौजूदा वजन घटाने वाली दवाओं की तरह साइड इफेक्ट नहीं देगी। वेगोवी जैसी दवाएं पेट की प्रक्रिया को धीमा कर देती हैं, जिससे मतली जैसे दुष्प्रभाव दिखते हैं, लेकिन pTOS सीधे दिमाग के हाइपोथैलेमस पर असर डालता है, जो भूख को नियंत्रित करता है। शोध में शामिल लेस्ली लेनवांड ने बताया कि यह तरीका मौजूदा उपचारों से बिल्कुल अलग और अधिक सुरक्षित साबित हो सकता है।
हालांकि नेचर मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित यह शोध अभी शुरुआती चरण में है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि मनुष्यों में इसके सुरक्षित और प्रभावी होने की पुष्टि के लिए और गहन अध्ययन की जरूरत होगी। फिर भी, यह खोज मोटापे के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में एक बड़ी उम्मीद के रूप में देखी जा रही है।