नहीं रही संघर्षों व जीवटता की प्रतिमूर्ति चौखुटिया की राधिका तिवारी, मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया था शरीर

चौखुटिया की घुंघोली बसभीड़ा निवासी राधिका तिवारी (राधिका अम्मा)का निधन हो गया है।85 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। सोशल मीडिया में”सास-बहू की…

Radhika tiwari Chaukhutia file photo

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चौखुटिया की घुंघोली बसभीड़ा निवासी राधिका तिवारी (राधिका अम्मा)का निधन हो गया है।85 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली।


सोशल मीडिया में”सास-बहू की गुफ्तगू” के नाम से जाने जानी वाली राधिका अम्मा के निधन पर क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है।


उनकी अंतिम इच्छा के अनुसा उनका पार्थिव शरीर अल्मोड़ा सोबन सिंह जीना मेडिकल कॉलेज को शोध के लिए समर्पित किया जा रहा है।


उपपा अध्यक्ष व घुंघोली निवासी पीसी तिवारी ने बताया कि राधिका तिवारी संघर्षों, जीवटता और सामाजिक सेवा की जीती जागती प्रतीक रहीं हैं।
उनकी ज़िंदगी संघर्ष की मिसाल थी।

उनके पति धाराबल्लभ जी का निधन हो गया। तब चाची सिर्फ 21 साल की थीं। अकेले दम पर खेती-किसानी कर उन्होंने अपने इकलौते बेटे ललित को पाला, पढ़ाया-लिखाया और सरकारी नौकरी के काबिल बनाया। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था 27 जुलाई 1988 को एक हादसे में बेटे की भी मृत्यु हो गई।


ज़िंदगी के इन तूफानों में उन्हें अपनी बहू, शिक्षिका और लेखिका दीपा तिवारी का साथ मिला। दुख ने इन दोनों सास-बहू को दोस्त बना दिया। यही रिश्ता हम सबने सोशल मीडिया पर “राधिका अम्मा और सास-बहू की गुफ्तगू” के नाम से खूब सराहा।


राधिका चाची सिर्फ घर तक सीमित नहीं रहीं। 2 फरवरी 1984 को बसभीड़ा से शुरू हुए “नशा नहीं रोजगार दो” आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। वे हर साल आंदोलन की वर्षगांठ पर मंच से बेबाकी से अपनी बात रखती थीं।


पहाड़ के संस्कारों और गांव के परिवेश में पली-बढ़ी चाची ने अंधविश्वासों और रूढ़ियों को तोड़कर अपनी बहू दीपा की प्रेरणा से देहदान का फैसला किया था। आज वे अपना वादा निभाकर चली गईं।


चाची के परिवार, बहू दीपा, पोते अनिरुद्ध और अभिषेक ने तय किया है कि उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए कोई क्रिया-कर्म नहीं किया जाएगा। शुक्रवार को ही उनका शव अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया जाएगा।

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