विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र हवालबाग में सोमवार 11 मई को “संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान” के तहत एक दिवसीय किसान गोष्ठी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ।
संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकान्त के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 61 प्रगतिशील किसानों ने भागीदारी की। इन 61 किसानों में 19 महिला कृषक भी शामिल रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए वैज्ञानिक डॉ. आर. पी. मीणा ने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की महत्ता पर विशेष बल देते हुए किसानों को रसायनों के अनियंत्रित प्रयोग से बचने की सलाह दी।
उन्होंने सचेत किया कि उर्वरकों का असंतुलित प्रयोग पर्यावरण के साथ-साथ भूमि की उर्वरता के लिए भी घातक हो सकता है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रकाश चन्द घासल ने किसानों को मृदा परीक्षण और मिट्टी के नमूने लेने की वैज्ञानिक तकनीकें विस्तार से समझाईं, जबकि प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पी. के. मिश्रा ने जैविक खेती और जैव उर्वरकों की भूमिका पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया।
इस दौरान इफको (IFFCO) के प्रतिनिधि नीरज कुमार ने बाजार में उपलब्ध नवीन उर्वरक उत्पादों की जानकारी दी। समापन सत्र में संस्थान के प्रभारी निदेशक डॉ. के. के. मिश्रा ने टिकाऊ कृषि के लिए मृदा स्वास्थ्य को सर्वोपरि बताते हुए आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। गोष्ठी में वैज्ञानिक डॉ. कुशाग्रा जोशी, डॉ. अशोक कुमार और ग्राम प्रधान पूरन सिंह नेगी सहित संस्थान के कई कार्मिक मौजूद रहे।

