ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी और शांति वार्ता के बेनतीजा रहने को लेकर ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघर गालिबाफ ने बड़ा बयान दिया है। गालिबाफ ने खुलकर बताया है कि आखिर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत में असली पेंच कहां फंसा हुआ है। उन्होंने अमेरिका की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए उसके शांति प्रस्ताव को महज एक छलावा करार दिया है।
शांति प्रस्ताव की आड़ में हमले की साजिश का आरोप
ईरानी स्पीकर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका द्वारा पेश किया गया पंद्रह सूत्रीय शांति प्रस्ताव असल में एक दिखावा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका शांति वार्ता की आड़ लेकर ईरान पर हमले की योजना बना रहा है। गालिबाफ के अनुसार अमेरिका एक तरफ तो कूटनीतिक बातचीत का माहौल बना रहा है और दूसरी तरफ जॉर्डन जैसे पड़ोसी मुल्कों में अपनी सेनाओं और हथियारों की तैनाती बढ़ा रहा है। अमेरिका के इसी दोहरे रवैये और अविश्वास के कारण बातचीत का पेंच फंसा हुआ है और यह किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पा रही है।
मनोवैज्ञानिक युद्ध और बाजार में हेरफेर का दावा
गालिबाफ ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीधा युद्ध लड़ने के बजाय सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से मनोवैज्ञानिक युद्ध यानी सॉफ्ट वॉर लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका डर का माहौल बनाकर बाजारों में हेरफेर कर रहा है और कीमतों को गिराकर आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश में जुटा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह साइकोलॉजिकल वॉर अमेरिका की सबसे बड़ी गलती साबित होगी।
किसी भी सैन्य दुस्साहस का मिलेगा मुंहतोड़ जवाब
अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए गालिबाफ ने कहा है कि वह किसी मुगालते में न रहे। यदि अमेरिका ने कोई सैन्य दुस्साहस किया या अमेरिकी सैनिक जमीन के रास्ते ईरान में दाखिल होने की कोशिश करते हैं तो उन्हें आग के हवाले कर दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के लोग अपने सुप्रीम लीडर के नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट हैं और किसी भी हमले का ऐसा माकूल जवाब देंगे कि दुश्मनों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।



