प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जेवर में बने भव्य नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को देश को समर्पित करते हुए इसकी शुरुआत की और कहा कि यह सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के विकास की नई दिशा है। लगभग 11,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह विशाल और अत्याधुनिक हवाई अड्डा आने वाले समय में पूरे एशिया के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विमानन केंद्रों में अपनी मजबूत जगह बनाने जा रहा है। मोदी ने उद्घाटन के दौरान यह भी कहा कि दिल्ली-एनसीआर के लिए यह एयरपोर्ट भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है और इसका असर पूरे उत्तर भारत के विकास पर पड़ेगा।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने प्रदेश में तेजी से बदलते माहौल और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे वैश्विक संकटों के प्रभाव का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत की मजबूती का सबसे बड़ा कारण यहां का निरंतर बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत के संकल्प को यह एयरपोर्ट नई ऊर्जा देगा। मोदी ने मंच से यह सुनिश्चित किया कि इस एयरपोर्ट की क्षमता ऐसी है कि यहां से हर दो मिनट में एक विमान उड़ान भरने लगेगा, जो इसे भारत के सबसे व्यस्त और प्रभावी हवाई केंद्रों में शामिल कर देगा।
प्रधानमंत्री ने भावुक होकर कहा कि उन्हें इस एयरपोर्ट का शिलान्यास करने का अवसर मिला था और आज वही परियोजना अपने पूरे वैभव के साथ उनके हाथों उद्घाटित हो रही है। उनके अनुसार, जिस उत्तर प्रदेश ने उन्हें अपना प्रतिनिधित्व करने का सम्मान दिया, उसी प्रदेश की पहचान को यह एयरपोर्ट और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब देश का वह राज्य बन चुका है जहां सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट मौजूद हैं, और यह संख्या प्रदेश की तरक्की को नए आयाम दे रही है।
वैश्विक हालात पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर चिंता जताई और कहा कि पूरी दुनिया इन दिनों अस्थिरता से जूझ रही है। खाद्य सामग्री, ईंधन और उर्वरकों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, क्योंकि इनका उत्पादन और निर्यात करने वाले कई क्षेत्रों में युद्ध जैसी स्थितियां बनी हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत भी कई महत्वपूर्ण वस्तुएं इन्हीं क्षेत्रों से आयात करता है, लेकिन सरकार ने ऐसी व्यवस्थाएं की हैं कि बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा बोझ देश के किसानों और आम परिवारों तक न पहुंचे।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों पर भी सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 के बीच इस एयरपोर्ट की फाइलें सिर्फ दफ्तरों में घूमती रहीं और परियोजना को आगे बढ़ने ही नहीं दिया गया। उनके अनुसार, उस समय नोएडा को विकास के केंद्र की तरह नहीं, बल्कि लूट के साधन के रूप में देखा गया। मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार ने आते ही इस परियोजना को प्राथमिकता दी और आज इसका पूरा ढांचा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए तैयार खड़ा है।
एयरपोर्ट के निर्माण और क्षमता को लेकर प्रधानमंत्री ने बताया कि इसका पहला चरण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर विकसित किया गया है और शुरुआती तौर पर इसे हर साल 1.2 करोड़ यात्रियों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। भविष्य में इसकी क्षमता को कई गुना बढ़ाकर 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य है, जिससे यह भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में अपनी पहचान को और मजबूत करेगा।
रनवे की तकनीकी खूबियों पर बात करते हुए बताया गया कि एयरपोर्ट में 3,900 मीटर लंबा मजबूत रनवे बनाया गया है, जो दुनिया के किसी भी बड़े ‘वाइड-बॉडी’ विमान के लिए पूरी तरह सक्षम है। इसकी एयरफील्ड लाइटिंग और इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं खराब मौसम में भी सुरक्षित उड़ान सुनिश्चित करेंगी। साथ ही, एयरपोर्ट में माल ढुलाई के लिए एक एकीकृत कार्गो टर्मिनल तैयार किया गया है, जिसकी शुरुआती क्षमता 2.5 लाख मीट्रिक टन निर्धारित की गई है।
इस परियोजना में 40 एकड़ के क्षेत्र में एक अत्याधुनिक MRO यानी मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल सेंटर भी शामिल है। यह सुविधा न केवल भारतीय विमानन कंपनियों के लिए बल्कि विदेशी एयरलाइनों के लिए भी बड़े स्तर पर मददगार होगी, क्योंकि यहां विमानों की मरम्मत और तकनीकी जांच अत्याधुनिक उपकरणों से की जा सकेगी।
एयरपोर्ट में बनाया गया 80 एकड़ का मल्टी-मॉडल कार्गो हब क्षेत्र के उद्योगों के लिए नई संभावनाएं खोलने वाला है। इस हब से निर्माण इकाइयों को सीधा लाभ मिलेगा और आयात-निर्यात को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही एयरपोर्ट को आधुनिक डिजिटल सुविधाओं से लैस किया गया है। डिजीयात्रा प्रणाली के माध्यम से यात्रियों को पेपरलेस एंट्री मिलेगी और बायोमेट्रिक पहचान की सुविधा से उनका सफर और आसान होगा। एयरपोर्ट को आधिकारिक DXN कोड मिल चुका है और इंडिगो तथा अकासा एयर जैसी प्रमुख एयरलाइंस संचालन के लिए तैयार हैं।
इस विशाल परियोजना की शुरुआत का सफर साल 2001 में उस समय के मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के विज़न से शुरू हुआ था।
इसके बाद कई उतार-चढ़ावों के बीच इसे 2019 में स्विस कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी को सौंपा गया। फिर 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी आधारशिला रखी और 2024 में पहली परीक्षण उड़ान सफलतापूर्वक रनवे पर उतरी। मार्च 2026 में सभी सुरक्षा और तकनीकी मंजूरियां मिलने के बाद आज यह एयरपोर्ट पूरी तरह संचालन के लिए खोल दिया गया है।



