पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हालिया घटनाओं को लेकर भारत सरकार के तीन प्रमुख मंत्रालयों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देश की स्थिति स्पष्ट की। इस दौरान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विदेश मंत्रालय तथा पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौजूदा हालात पर जानकारी दी और आम लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को लेकर कोई समस्या नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत के पास लगभग 258 मिलियन मीट्रिक टन की रिफाइनिंग क्षमता है और पेट्रोल-डीजल के मामले में देश लगभग आत्मनिर्भर है। सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता या उससे अधिक पर काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। साथ ही पीएनजी और सीएनजी की सप्लाई भी बिना किसी कटौती के जारी रखी जा रही है।
हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि एलपीजी को लेकर फिलहाल दबाव की स्थिति बनी हुई है। इसका कारण यह है कि भारत के तेल आयात का बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के रास्ते आता है और वहां की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है। इसके बावजूद मंत्रालय ने साफ किया कि देश में एलपीजी खत्म होने जैसी कोई स्थिति नहीं है।
मंत्रालय के अनुसार देशभर में करीब 25 हजार गैस वितरकों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और कहीं भी गैस खत्म होने की रिपोर्ट नहीं मिली है। अधिकारियों ने बताया कि आम तौर पर देश में रोजाना लगभग 50 से 55 लाख सिलेंडर की बुकिंग होती है, लेकिन हाल के दिनों में यह संख्या बढ़कर 75 से 76 लाख तक पहुंच गई है। इसे पैनिक बुकिंग बताया गया और लोगों से अपील की गई कि वे घबराकर सिलेंडर बुक न करें।
सरकार ने एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए कुछ वैकल्पिक इंतजाम भी शुरू किए हैं। इसके तहत 48 हजार किलोलीटर अतिरिक्त कैरोसीन राज्यों को आवंटित किया गया है, जिसे जिलों में चिन्हित स्थानों पर वितरित किया जाएगा। इसके अलावा छोटे व्यवसायों और होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर के लिए कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
पीएनजी को लेकर भी सरकार ने लोगों को प्रोत्साहित किया है। अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल देश में करीब डेढ़ करोड़ घरेलू उपभोक्ता पीएनजी का उपयोग कर रहे हैं और करीब 60 लाख घर ऐसे हैं जहां आसानी से पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराया जा सकता है। सरकार का मानना है कि अधिक लोग पीएनजी अपनाएंगे तो एलपीजी पर दबाव कम होगा।
इधर एलपीजी की मांग बढ़ने के बीच कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों की तस्वीरें भी सामने आई हैं। इस मुद्दे को लेकर संसद में भी विपक्ष ने सरकार को घेरा और ऊर्जा संकट पर चर्चा की मांग की। संसद परिसर में विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन भी किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान समुद्री क्षेत्र से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई। अधिकारियों ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में फिलहाल भारतीय झंडे वाले 24 जहाज मौजूद हैं, जो होर्मुज़ स्ट्रेट के पश्चिम में फारस की खाड़ी में तैनात हैं। इन जहाजों पर कुल 677 भारतीय समुद्री कर्मचारी काम कर रहे हैं। वहीं ओमान की खाड़ी में भी कुछ भारतीय जहाज मौजूद थे, जिनमें से एक तेल टैंकर ‘जग प्रकाश’ को वहां से सुरक्षित हटा लिया गया है।
इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में लगभग 23 हजार भारतीय समुद्री कर्मचारी विभिन्न व्यापारी जहाजों, बंदरगाह संचालन और ऑफशोर पोतों पर काम कर रहे हैं। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग लगातार इन सभी से संपर्क में है और हालात पर नजर बनाए हुए है।
