दुनिया पर तेल संकट , जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री को किया फोन, जानिए क्या हुई बातचीत

ईरान और अमेरिका इजरायल के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास…

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ईरान और अमेरिका इजरायल के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर विस्तार से बातचीत की। ईरान के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों ने पश्चिम एशिया के लगातार बिगड़ते हालात और इस अशांत माहौल में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में लड़ाई और हमलों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद से जयशंकर और अराघची के बीच यह तीसरी फोन वार्ता थी। इस दौरान ईरानी विदेश मंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में बढ़ रही असुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। अराघची का कहना था कि समुद्री मार्गों में पैदा हुई यह अस्थिरता अमेरिका और इजरायल की आक्रामक गतिविधियों का सीधा परिणाम है, जिससे शिपिंग और समुद्री आवाजाही दोनों प्रभावित हुई हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि इस संकट की जिम्मेदारी तय की जाए और अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाए जाएं।

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डॉ. जयशंकर ने भी सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि ईरान के विदेश मंत्री के साथ क्षेत्र की नवीनतम परिस्थितियों पर ठोस चर्चा हुई है और दोनों पक्ष लगातार संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि यह वार्ता उस समय हो रही है जब ईरान ने मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित किया है। यह घोषणा उनकी पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में मौत के कुछ दिन बाद की गई, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और गहराता गया है।
अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि चार मार्च को श्रीलंका के पास अमेरिकी बलों द्वारा एक ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने की घटना पर दोनों मंत्रियों के बीच चर्चा हुई या नहीं। वहीईरान द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध कर देने के बाद वैश्विक तेल और गैस बाजार में तेज उछाल देखा गया है। भारत ने इस हालात पर अपनी गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता उसकी ऊर्जा जरूरतों और नागरिकों की सुरक्षा पर सीधा प्रभाव डाल रही है।

डॉ. जयशंकर ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से भी बातचीत की है। भारत का स्पष्ट मानना है कि यह संघर्ष सिर्फ भूराजनीतिक चुनौती नहीं है, बल्कि इसके गंभीर आर्थिक असर भी हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है, इसलिए समुद्री रास्तों पर किसी भी तरह का खतरा देश की अर्थव्यवस्था, बाजार और सप्लाई चेन को प्रभावित कर देता है।

खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रह रहे हैं और उनकी सुरक्षा भारत सरकार की प्राथमिक चिंता है। नई दिल्ली कई बार साफ कर चुकी है कि व्यापारिक जहाजों पर हमले अस्वीकार्य हैं और क्षेत्र में शांति बहाल करने का रास्ता केवल वार्ता और कूटनीतिक प्रयासों से ही निकल सकता है। भारत लगातार यह अपील कर रहा है कि सभी पक्ष हिंसा रोककर बातचीत का रास्ता अपनाएं, ताकि इस संकट का समाधान जल्द से जल्द निकाला जा सके।

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