एंड्रॉयड फोन चलाने वालों के लिए बेहद गंभीर चेतावनी सामने आई है। सुरक्षा विशेषज्ञों ने खुलासा किया है कि कुछ कृत्रिम बुद्धि वाले मोबाइल ऐप्स की वजह से उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी बिना किसी सुरक्षा के खुले वेब पर पहुंच गई। चूंकि ये ऐप्स सीधे गूगल के आधिकारिक मंच पर उपलब्ध थे, इसलिए इस घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
जांच में यह बात सामने आई कि इन ऐप्स के सर्वर पर रखी गई तस्वीरें, वीडियो और कृत्रिम बुद्धि की मदद से बनाई गई कई फाइलें किसी भी सुरक्षा ढांचे के बिना उपलब्ध थीं। यह स्थिति इस बात को लेकर सवाल खड़ा करती है कि क्या हर मोबाइल ऐप पर आंख मूंदकर भरोसा करना सुरक्षित है।
इस पूरे मामले के केंद्र में वह ऐप रहा, जिसे लाखों लोगों ने अपने फोन में डाउनलोड किया था। इस ऐप पर लगाए गए आरोपों के अनुसार इसका बादल स्टोरेज गलत तरीके से तैयार किया गया था, जिसके कारण कोई भी व्यक्ति बिना किसी पहचान सत्यापन के वहां रखी सामग्री तक पहुंच सकता था। विशेषज्ञों का कहना है कि इसी गलती की वजह से करोड़ों फाइलें खुले इंटरनेट पर पड़ी रहीं और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।
इसी कंपनी के एक और मोबाइल अनुप्रयोग में भी लापरवाही का बड़ा मामला उजागर हुआ। इस दूसरे ऐप में उन दस्तावेजों की प्रतियां भी असुरक्षित मिलीं, जिन्हें पहचान सत्यापन के दौरान जमा कराया जाता है। इनमें घर का पता, पहचान पत्र, फोन नंबर और वह सारी निजी जानकारी शामिल थी, जिसे वित्तीय संस्थाएं किसी व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करने के लिए प्रयोग में लाती हैं। बताया जा रहा है कि इस अनदेखी का प्रभाव कई देशों के लोगों पर पड़ा है, जिनमें भारत के अलावा अन्य बड़े देश भी शामिल हैं।
इन दोनों ऐप्स को बनाने वाली कंपनी की ओर से यह जानकारी दी गई कि प्रभावित डेटा को सुरक्षित कर दिया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि कई ऐप बनाने वाली कंपनियां सुरक्षा को उतना महत्व नहीं देतीं, जितना देना चाहिए।
जांचकर्ताओं ने यह भी बताया कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई डेवलपर अपने ऐप के अंदर ही गोपनीय कुंजियों और पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारी डाल देते हैं। जैसे ही यह कोड कहीं भी खुला मिलता है, स्वचालित तकनीकें तुरंत इन जानकारियों को खोज लेती हैं और दुरुपयोग करके लोगों के डेटा तक पहुंच बना लेती हैं। शोध में यह भी पाया गया कि मंच पर उपलब्ध बहुत बड़ी संख्या में ऐप्स में यही खामी मौजूद है, जो बेहद चिंताजनक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उपयोगकर्ताओं को किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले सतर्क रहना चाहिए। कम पहचान वाले ऐप्स से दूरी रखना बेहतर है। मोबाइल पर आने वाली अनुमतियों को ध्यान से पढ़ने की जरूरत है। इसके साथ ही यह भी समझदारी है कि बिना आवश्यकता के किसी ऐप में अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेज अपलोड न किए जाएं, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।
