किच्छा में भी हड़ताल पर डटी रहीं आशा वर्कर्स

  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आशा स्वास्थ्य कर्मियों ने आज सरकार पर अपनी मांगों की अनदेखी करने के आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि  जब तक…

Chat-GPT-Image-May-15-2026-07-48-08-PM

1c8b58dd7e8ab4cc4eacefb4dc7f0029
 

25

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आशा स्वास्थ्य कर्मियों ने आज सरकार पर अपनी मांगों की अनदेखी करने के आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि  जब तक उनकी मांगों पर कार्यवाही नही होती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। 

आज धरना प्रदर्शन में मुख्य रूप से अध्यक्ष सिमरन कौर, उपाध्यक्ष निर्मला सियालकोटी,सचिव हेमा अरोरा , नीता पांडे आशा बोरा दया मेहरा मंजू बिष्ट सहित कई आशा कार्यकर्ती मौजूद थी। 

आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा और न्यूनतम 21 हजार वेतन लागू करने, जब तक मासिक वेतन और कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलता तब तक आशाओं को भी अन्य स्कीम वर्कर्स की तरह मासिक मानदेय फिक्स किया करने, सभी आशाओं को सेवानिवृत्त होने पर पेंशन का प्रावधान किया करने, कोविड कार्य में लगी सभी आशा वर्करों कोरोना ड्यूटी की शुरुआत से 10 हजार रू० मासिक कोरोना-भत्ता भुगतान देने, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा समेत बारह सूत्रीय मांगों को लेकर 2 अगस्त से चल रही हड़ताल के तहत ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने हड़ताल के नौवें दिन भी धरना जारी रखा। हड़ताली वर्कर्स ने। आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।

उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने कहा कि, “आशाओं से काम लेने में तो सरकार बड़ी तत्परता दिखाती है और सारी बातचीत होने के बाद भी मासिक मानदेय का फैसला करने में इतनी देर क्यों लगा रही है यह समझ से परे है। 

यह आशाओं के प्रति सरकार की सोच को स्पष्ट उजागर कर देता है।
आशाओं को काम में झोंकने में सरकार गर्मी, जाड़ा, बरसात कुछ नहीं देखती और आशाएँ भी हर मौसम में अपनी सुरक्षा की परवाह किये बिना स्वास्थ्य विभाग के कार्यों में जुटी रहती हैं।

इसलिए सरकार को ज्यादा देर न करके तुरंत आशाओं की माँगों को मानते हुए उनको मासिक वेतन और कर्मचारी का दर्जा देने की बात मान लेनी चाहिए।

धरना प्रदर्शन कार्यक्रम में किच्छा अध्यक्ष सिमरन कौर, सचिव्हेम अरोरा, निर्मला सुयालकोटी,नित पांडे, दया मेहरा आशा बोरा, पूंनम गंगवार, दीप कोरंगा मंजू, बिष्ट सनावती, सिलामन मुन्नी पाठक
 समेत बड़ी संख्या में आशा वर्कर्स मौजूद रही।