मध्य पूर्व में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारत के रसोईघरों तक दिखाई देने लगा है। कई शहरों में एलपीजी की कमी के कारण सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें गैस एजेंसियों के बाहर लग रही हैं। स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि कुछ जगहों पर सिलेंडर की सप्लाई सीमित कर दी गई है। जानकारों का मानना है कि यदि यह भू-राजनीतिक संघर्ष आगे बढ़ता रहा, तो पेट्रोल डीजल के साथ घरेलू गैस की उपलब्धता भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सिलेंडर मिलना मुश्किल हो जाए या उसकी कीमतें घर के बजट को तहस नहस करने लगें, तो आखिर रोज़मर्रा का खाना कैसे तैयार होगा। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए ऐसे विकल्पों पर नजर डालना जरूरी हो गया है, जो संकट की घड़ी में रसोई को चलाते रहने में मदद कर सकते हैं।
धूप वाले घरों में सोलर कुकर बेहद उपयोगी विकल्प साबित हो सकता है क्योंकि यह सूरज की रोशनी को केंद्रित कर भोजन पकाता है। इसमें थोड़ा समय अधिक जरूर लगता है, लेकिन खाने के पोषक तत्व पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। इसकी सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि इसे रात में या बादलों से घिरे दिनों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। वहीं बिजली वाले इंडक्शन कुकटॉप ने हाल के वर्षों में शहरी घरों में अपनी मजबूत जगह बना ली है। चुंबकीय ऊर्जा के जरिए सीधे बर्तन को गर्म करने वाले इस उपकरण में खुली लौ नहीं होती, जिससे यह सुरक्षित और साफ सुथरा रहता है। हालांकि इसे चलाने के लिए इंडक्शन वाले बर्तन जरूरी होते हैं और बिजली कटने पर यह बेकार साबित होता है। इसी तरह इलेक्ट्रिक राइस कुकर भी सिर्फ चावल पकाने तक सीमित नहीं है, बल्कि दाल, सब्जी, सूप और हलवे जैसी कई चीजें भी आसानी से इसमें बनाई जा सकती हैं।
बस सामग्री डालकर स्विच ऑन करना होता है और पकने पर यह खुद बंद हो जाता है।
इन्फ्रारेड इलेक्ट्रिक स्टोव का ढांचा भले इंडक्शन जैसा लगे लेकिन इसका काम करने का तरीका बिल्कुल अलग होता है। इसमें लगी कॉयल बर्तन को गर्म करती है और खास बात यह है कि इसमें स्टील, एल्युमिनियम, मिट्टी या कांच किसी भी प्रकार के बर्तन रखे जा सकते हैं। इसकी ऊपरी सतह बेहद गर्म हो जाती है, इसलिए पकाने के बाद सावधानी जरूरी होती है। पुराने दौर से चला आ रहा कॉयल स्टोव, जिसे लोग हॉट प्लेट भी कहते हैं, कम बजट वालों के लिए आज भी एक सस्ता विकल्प है। बिजली लगते ही इसकी कॉयल लाल होकर गर्म होने लगती है, हालांकि यह इंडक्शन की तुलना में ज्यादा ऊर्जा खपत करता है और गर्म होने में भी थोड़ा समय लेता है।
इमरजेंसी स्थितियों में माइक्रोवेव ओवन भी बड़ी राहत दे सकता है। आमतौर पर इसे खाना गर्म करने के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर इसमें सब्जियां भाप में पकाना, ढोकला बनाना या हल्की फुल्की कुकिंग आसानी से की जा सकती है। यह भोजन के अंदर मौजूद पानी के अणुओं को गर्म कर उसे जल्दी पकाता है, परन्तु तली हुई चीजें या डोसा जैसा खाना इसमें तैयार नहीं किया जा सकता। ऐसे समय में रॉकेट स्टोव भी शानदार विकल्प है, जो लकड़ी के छोटे टुकड़ों पर चलता है और कम ईंधन में तेज आंच देता है। धुआं भी बहुत कम निकलता है, इसलिए इसे खुले स्थान जैसे बालकनी या आंगन में इस्तेमाल करना बेहतर रहता है।
गांवों के लिए बायोगैस स्टोव बेहद किफायती और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है क्योंकि यह गोबर या जैविक कचरे से बनी मीथेन गैस पर चलता है। बस थोड़ा खुला स्थान चाहिए और ईंधन का खर्च लगभग खत्म हो जाता है। यात्रा करने वालों के लिए ब्यूटेन कार्ट्रिज स्टोव काम आता है, जो छोटा और पोर्टेबल होता है। कार्ट्रिज लगाने के बाद यह लगभग गैस स्टोव की तरह ही काम करता है, हालांकि कार्ट्रिज की कीमत सामान्य से थोड़ी अधिक होती है। इसके अलावा बायोमास पेलेट स्टोव भी ऐसा विकल्प है, जो लकड़ी के बुरादे या कृषि अवशेषों से बने छोटे पेलेट्स पर चलता है और पारंपरिक लकड़ी वाले चूल्हों की तुलना में कम धुआं पैदा करता है। इसकी चुनौती यही है कि हर इलाके में पेलेट्स आसानी से उपलब्ध नहीं होते, इसलिए इसकी उपयोगिता क्षेत्र के हिसाब से बदल जाती है।
