उत्तराखंड में एलपीजी गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर सरकार और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति और सप्लाई चेन पर पड़ने वाले संभावित असर को देखते हुए राज्य स्तर पर एहतियाती कदम उठाए गए हैं, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की कमी या अव्यवस्था न पैदा हो।
राज्य में गैस आपूर्ति को घरेलू और व्यावसायिक श्रेणियों में अलग अलग आंका जा रहा है। सामान्य तौर पर हर महीने करीब 1.72 लाख व्यावसायिक सिलेंडरों की खपत होती है, लेकिन मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए सरकार ने इस वितरण पर 20 प्रतिशत की अस्थायी कटौती लागू कर दी है।
इसके बाद फिलहाल लगभग 34,400 सिलेंडर ही बाजार में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट्स के लिए प्रतिदिन लगभग 1,400 सिलेंडरों की आपूर्ति तय की गई है, जबकि गैस कंपनियों को सुरक्षा के लिहाज से रोजाना 2,650 सिलेंडर रिजर्व रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ते ही अतिरिक्त गैस तुरंत उपलब्ध कराई जा सके।
प्रशासन ने साफ किया है कि व्यावसायिक श्रेणी में गैस वितरण एकमुश्त नहीं होगा, बल्कि जरूरत के अनुसार चरणबद्ध तरीके से सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। केवल वही उपभोक्ता गैस पा सकेंगे जिनका पंजीकरण पूरा है और जो नियमित रूप से एजेंसी से सिलेंडर लेते रहे हैं। इससे फर्जी मांग और स्टॉक जमा करने की कोशिशों पर रोक लगेगी। राहत यह है कि अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को इन पाबंदियों से पूरी तरह मुक्त रखा गया है और उनके लिए सौ प्रतिशत आपूर्ति जारी रहेगी।
घरेलू गैस वितरण में बैकलॉग की समस्या फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। हल्द्वानी में बैकलॉग करीब साढ़े छह दिन तक पहुंच गया है, जबकि सामान्य समय में यह सिर्फ एक-दो दिन का ही रहता है। राज्य के दूसरे हिस्सों में भी लगभग पाँच दिन की देरी दर्ज की गई है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में बुकिंग का दबाव कम होने से हालात में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। शुरुआती दिनों में प्रतिदिन लगभग 55 हजार बुकिंगें हो रही थीं, जबकि अब यह संख्या घटकर करीब 30 हजार रह गई है।
इसके बावजूद पाँच से दस दिन के बैकलॉग में करीब 37,499 बुकिंगें अब भी अटकी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। बैकलॉग बढ़ने की एक वजह यह भी सामने आई है कि कई उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन की बजाय मैनुअल बुकिंग कराई थी। वितरण तो हो गया, लेकिन लगभग 8,000 सिलेंडरों की एंट्री ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज नहीं हो पाई, जिसके कारण रिकॉर्ड में बैकलॉग वास्तविक स्थिति से अधिक दिख रहा है।
सरकार का दावा है कि घरेलू और व्यावसायिक दोनों श्रेणियों में गैस आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। जैसे जैसे बुकिंग का दबाव कम हो रहा है, उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य में एलपीजी गैस की स्थिति जल्द ही पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।

