उत्तराखंड में अब टिंट मीटर से होगी जांच, पता चल सकेगा मानकों के अनुसार है या नहीं कार के काले शीशे

अब कार के शीशे पर लगी काली फिल्म का आकलन अंदाज से नहीं बल्कि तकनीकी उपकरण से किया जाएगा। परिवहन विभाग ने वाहनों के शीशे…

Screenshot 20260224 084037 Dailyhunt
21e7b59e-b909-45ce-800c-4b81d0841272

अब कार के शीशे पर लगी काली फिल्म का आकलन अंदाज से नहीं बल्कि तकनीकी उपकरण से किया जाएगा। परिवहन विभाग ने वाहनों के शीशे की पारदर्शिता को मापने के लिए टिंट मीटर खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


इस माध्यम से यह स्पष्ट हो जाएगा कि वहां के शीशे निर्धारित मानक के अनुरूप है या नहीं। परिवहन विभाग के नियमावली के अनुसार कार में यदि काले रंग के शीशे लगे हैं तो उसमें 70% तक की पारदर्शिता होना अनिवार्य है।

सामान्य रूप से आगे और पीछे के शीशे में उच्च दृश्यता अनिवार्य होती है जबकि साइड विंडो पर केवल 30% तक टिंट की अनुमति होती है। इससे अधिक काले शीशे प्रतिबंधित माने जाते हैं।


अब तक विभाग के पास इसे मापने का कोई वैज्ञानिक उपकरण नहीं था, जिसके चलते कई बार केवल अनुमान के आधार पर चालान किए जाते थे। इससे वाहन चालकों और प्रवर्तन टीम के बीच विवाद की स्थिति भी बनती रही।


वही काले शीशे के प्रयोग अपराधियों के लिए अधिक सुविधाजनक भी हो जाता है। इससे यह नहीं पता चल पाता है कि वाहन के अंदर कौन बैठा है? बढ़ती हुई शिकायत और पारदर्शिता की आवश्यकता को देखते हुए विभाग ने तकनीकी समाधान अपने का निर्णय लिया है। इसलिए टिंट मीटर की खरीद की जा रही है।

पहले चरण में इसके लिए 45 सेंटीमीटर खरीदे जाएंगे जो प्रवर्तन दलों को सौंपे जाएंगे।


उप आयुक्त परिवहन शैलेश बगौली का कहना है कि उपकरण उपलब्ध होते ही इन्हें प्रवर्तन दलों को सौंपा जाएगा। इससे एक ओर सड़क सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित होगा, वहीं दूसरी ओर बेवजह के विवाद और मनमानी की शिकायतों पर भी अंकुश लगेगा। इस व्यवस्था से कार्रवाई अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी।


आपको बता दे की टेंट मी एक डिजिटल उपकरण है जिसे शीशे पर लगाकर उसके प्रकाश पारगम्यता (लाइट ट्रांसमिशन) का प्रतिशत तुरंत स्क्रीन पर देखा जा सकता है। इससे मौके पर ही स्पष्ट हो जाएगा कि वाहन नियमों का उल्लंघन कर रहा है या नहीं।

Leave a Reply