भारत के इस शहर में सबसे ज्यादा लोग दे रहें अपने पार्टनर को धोखा, देख लीजिए कही लिस्ट में आपका शहर भी तो नहीं

देश में शादी से बाहर रिश्ते बनाने की प्रवृत्ति पिछले कुछ समय में जिस तरह सामने आई है, उसने समाज में तेज़ी से हो रहे…

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देश में शादी से बाहर रिश्ते बनाने की प्रवृत्ति पिछले कुछ समय में जिस तरह सामने आई है, उसने समाज में तेज़ी से हो रहे बदलावों को उजागर कर दिया है। बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के बीच यह चलन और अधिक दिखाई दे रहा है, जहां निजी भावनाओं और दबे हुए अकेलेपन को लोग अब इंटरनेट के जरिये अलग अंदाज़ में तलाशते नज़र आ रहे हैं। इसी तस्वीर में सबसे ऊपर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु दिखाई देती है, जहां इस तरह के संबंध बनाने के लिए ऑनलाइन माध्यम का सबसे अधिक उपयोग बताया गया है।

एक और रोचक तथ्य यह है कि तमिलनाडु के शांत और धार्मिक माहौल वाले शहर कांचीपुरम ने इस मामले में दिल्ली और मुंबई जैसे विशाल महानगरों को पीछे छोड़ते हुए एक बिल्कुल नई पहचान हासिल कर ली है। यह जानकारी विवाहेतर रिश्तों से जुड़े आंकड़े पेश करने वाली संस्था Ashley एशली मैडिसन की ताज़ा रिपोर्ट में सामने आई है।
दूसरी ओर, दुनिया में विवाह से परे रिश्ते तलाशने के लिए बनाए गए पहले मंच ग्लीडन ने बताया है कि भारत में अब इसके साथ जुड़ने वालों की संख्या 40 लाख से ज़्यादा हो चुकी है। यहां मौजूद आँकड़े दिखाते हैं कि इसमें पुरुषों की हिस्सेदारी करीब पैंसठ प्रतिशत है, जबकि महिलाओं की भागीदारी पैंतीस प्रतिशत के आसपास पहुंच चुकी है और इसमें तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

अगर देखा जाए कि देश में कौन कौन से शहर इस प्रवृत्ति के केंद्र बन रहे हैं, तो तस्वीर और भी दिलचस्प दिखती है। बेंगलुरु लगभग अठारह प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है। इसके बाद तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद करीब सत्रह प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। राष्ट्र की राजधानी दिल्ली में यह संख्या लगभग ग्यारह प्रतिशत बताई गई है, जबकि महाराष्ट की आर्थिक राजधानी मुंबई 9% के करीब है। पुणे भी सात प्रतिशत के आसपास हिस्सेदारी बनाते हुए इस सूची में शामिल है।
बात केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। अब देश के उभरते शहरों जैसे लखनऊ, चंडीगढ़, सूरत, कोयंबटूर, भुवनेश्वर, पटना, गुवाहाटी और रायपुर में भी लोग इस तरह के रिश्तों की तलाश में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने लगे हैं, जिससे यह साफ हो जाता है कि यह चलन अब सिर्फ बड़े शहरी क्षेत्रों तक बंधा नहीं रह गया है।

इन मंचों के उपयोग के तौर तरीकों से भी कई दिलचस्प बातें सामने आती हैं। अधिकांश लोग दिन में करीब एक से डेढ़ घंटा बातचीत में बिताते हैं। सबसे अधिक गतिविधि दो समय में देखी जाती है पहला दोपहर के बारह बजे से तीन बजे के बीच, और दूसरा रात दस बजे के बाद, जब घर परिवार की व्यस्तताएं कम हो जाती हैं और निजी समय मिल पाता है।

रिश्तों की तलाश में पुरुष और महिलाएं किस तरह की पसंद रखती हैं, यह भी इन आंकड़ों से झलकता है। अधिकांश पुरुष पच्चीस से तीस वर्ष की उम्र वाली महिलाओं से जुड़ना पसंद करते हैं, जबकि कई महिलाएं तीस से चालीस वर्ष के बीच के पुरुषों को प्राथमिकता देती हैं। इसके साथ ही, कई महिलाएं ऐसे पुरुषों को चुनती हैं जिनका पेशा स्थिर हो और जिन पर आर्थिक रूप से भरोसा किया जा सके।

समाज में रिश्तों को लेकर हो रहे इस बदलाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बीते दशक में डिजिटल परिचय का दायरा भले ही तेजी से फैला हो, मगर अब लोग अपने भीतर छिपी भावनाओं और अधूरी इच्छाओं को भी आधुनिक तरीकों से व्यक्त करने लगे हैं। ऐसे मंचों की तेज़ी से बढ़ती पहुँच बताती है कि देश में रिश्तों की सोच और निजी जीवन का स्वरूप बड़ी तेजी से बदल रहा है।