ना कोई चोरी, ना कोई लूट, ना कोई मारपीट छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के घने जंगलों के बीच बसा सोनपुर थाना देश के सबसे अनोखे स्थान में से एक है। यह वह जगह है जहां थाना तो है लेकिन पुलिस की कोई जरूरत नहीं है। यहां की हवालात हमेशा खाली रहती है जिसमें कभी किसी को भी बंद करने की जरूरत महसूस नहीं होती है।
यह गांव वाले बताते हैं कि उन्होंने कभी ताले तक नहीं खरीदे क्योंकि उन्हें यहां सभी पर भरोसा है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद सोनपुर थाना अपने आप में शांति और आपसी समझ का बेहद सुंदर उदाहरण है।
2020 में बने इस थाने के तहत 63 गांव आते हैं, जहां करीब 1500 लोग रहते हैं। चोरी, लूट या आपसी झगड़े जैसे मामले यहां कभी सामने नहीं आए। यहां लोग छोटे झगड़े भी आपस में बैठकर सुलझा लेते हैं। इसलिए पुलिस तक बात पहुंचने की नौबत ही नहीं आती।
सोनपुर थाने में करीब 23 पुलिस कर्मी है लेकिन आज तक यहां कोई शिकायत नहीं आई है। हवालात का दरवाजा पिछले 5 साल में सिर्फ एक या दो ही बार खुला होगा, वहां भी पंचायत चुनाव के दौरान मत पेटियां रखने के लिए काम आता है।
इसके बाद से हवालात हमेशा खुला रहता है और उसका कभी भी ताला नहीं लगाया जाता है।
हालांकि यह इलाका नक्सल प्रभावित जगह है, इसलिए अब तक यहां करीब 36 केस दर्ज हुए हैं लेकिन ये सभी नक्सली मुठभेड़ों और सुरक्षा अभियानों से जुड़े हैं। आम लोगों से जुड़ा कोई भी अपराध से जुड़ा एक भी मामला यहां दर्ज नहीं हुआ।
गरपा गांव की महिला बताती हैं कि उनके गांव में कोई घर ताला नहीं लगाता है। अगर कोई बीमार पड़ जाए या बाहर जाना पड़े तो पूरा गांव उस घर की जिम्मेदारी लेता है। झगड़ा होने पर पंच बैठकर फैसला करते हैं और सभी उसे मानते हैं। कई लोगों को तो यह तक पता नहीं कि उनके गांव के लिए अलग से कोई थाना भी है।
सोनपुर थाना यह दिखाता है कि जब समाज में भरोसा, संवाद और आपसी जिम्मेदारी मजबूत होती है, तो कानून की सख्ती की जरूरत खुद ब खुद कम हो जाती है। नक्सल प्रभावित जगह में मौजूद यह थाना देश के लिए एक अलग और पॉजिटिव मॉडल बनकर सामने आया है।
