राज्य आंदोलनकारी तथा दुग्ध संघ अल्मोड़ा की प्रबंध कमेटी के सदस्य ब्रह्मानन्द डालाकोटी ने सरकार से मांग की है कि यदि सरकार दुग्ध सहकारिता की चुनाव प्रणाली में आवश्यक सुधार कर उन्हें मजबूत बनाते हुए उन्हें उन्हें पर्याप्त अधिकार नहीं देना चाहती है तो इससे बेहतर है दुग्ध सहकारिता में चुनाव प्रणाली को ही खत्म कर दिया जाये।
उन्होंने अपने बयान में कहा है कि दुग्ध समितियों में चुनाव होते ही वर्तमान नियम कानूनों के चलते दुग्ध संघ तथा डेरी विकास उन्हें अस्थिर करने के प्रयास शुरू कर देते हैं। जिससे अनेक समितियों में अगले वर्ष ही चुनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, वर्तमान नियमों के चलते दो तिहाई समितियां चुनाव के लिए अर्ह ही नहीं हो पाती।
जिन समितियों में चुनाव हो भी जाता है उनमें आधी अगले वर्ष अनर्ह हो जाती हैं 90% दुग्ध समितियां अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाती हैं।
इन नियमों के चलते वर्तमान में राज्य स्तरीय फैडरेशन भी प्रबन्ध कमेटी विहीन चल रहा है। दुग्ध संघ की प्रबंध कमेटियां के जहां सरकार ने विगत वर्षों में अधिकार कम कर दिए हैं वहीं कमेटियों तथा प्रबंधकों ,तथा अन्य उच्च अधिकारियों के बीच चलने वाली तनातनियों से दुग्ध उत्पादकों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
कहा कि इधर समिति सचिवों ने भी प्रबंध कमिटियों के अस्तित्व पर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि संभवतया वे भी प्रबंध कमेटी की व्यवस्था नहीं चाहते हैं ऐसी स्थिति में जब राज्य सरकार से लेकर प्रारम्भिक समिति के सचिव तक प्रबंध कमेटियों को निरर्थक समझ रहे हैं तो फिर क्यों समितियों, संघों में बार बार चुनाव थोपकर जनता एवं सरकार के समय वह धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसलिए उचित होगा प्रबंध कमेटी व्यवस्था समाप्त कर दी जाये और सभी प्रबंध कमेटियों को भंग कर दिया जाये।

