अल्मोड़ा के इस गांव में फायर झोंककर दहशत फैलाना पड़ा महंगा,अब तोड़ी पड़ेगी जेल की रोटिया

अल्मोड़ा/धौलछीना: शांत वादियों में लाइसेंसी बंदूक की धौंस दिखाकर दहशत फैलाने का ख्वाब देख रहे एक शख्स का गुरूर पुलिस ने तब मिट्टी में मिला…

Terror in Almora Village: Firing Licensed Gun Proves Costly

अल्मोड़ा/धौलछीना: शांत वादियों में लाइसेंसी बंदूक की धौंस दिखाकर दहशत फैलाने का ख्वाब देख रहे एक शख्स का गुरूर पुलिस ने तब मिट्टी में मिला दिया जब धौलछीना क्षेत्र के मंगलता गांव में सरेआम फायरिंग करने वाले अभियुक्त को पुलिस ने दबोच कर सलाखों के पीछे भेज दिया। एसएसपी अल्मोड़ा के ने कहा है कि देवभूमि में गुंडागर्दी करने वालों की जगह सिर्फ जेल है।


मामला धौलछीना थाना क्षेत्र के मंगलता गांव का है, जहाँ राजू उर्फ राजेन्द्र सिंह नेगी ने तैश में आकर गांव के ही एक परिवार पर अपनी लाइसेंसी बंदूक से फायर झोंक दिया। इस मामले में पीड़ित के भाई सुरेश सिंह चम्याल ने निडरता दिखाते हुए पुलिस को तहरीर दी। सुरेश सिंह की शिकायत के अनुसार अभियुक्त राजू ने उनके भाई अर्जुन सिंह, बहू दीपा देवी और भतीजे मनजीत सिंह को निशाना बनाया।शिकायत के अनुसार अभियुक्त ने उन्हें न सिर्फ भद्दी-भद्दी गालियां दीं, बल्कि जान से मारने की नीयत से फायरिंग भी कर दी।इसके बाद पुलिस ने अभियुक्त् को गिरफ्तार कर लिया।

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क्रोध की आग और पुलिस का वार:
गिरफ्तारी के बाद अभियुक्त का कहना था कि वह ‘तनाव’ में था और इसी गुस्से में उसने फायरिंग कर दी। लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी का तनाव उसे सुरेश सिंह के परिवार की जान जोखिम में डालने का हक दे देता है?


वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) चंद्रशेखर घोडके के निर्देश पर धौलछीना थानाध्यक्ष सुनील सिंह बिष्ट की टीम ने फुर्ती दिखाते हुए अभियुक्त को उसके घर से ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मौके से 12 बोर की DBBL लाइसेंसी बंदूक, खोखा कारतूस और जिंदा कारतूस बरामद कर लिए हैं।


लाइसेंस निरस्तीकरण की तैयारी
पकड़े गए अभियुक्त राजू उर्फ राजेन्द्र सिंह नेगी (55 वर्ष) का पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है, जिसमें वह विदेशी अधिनियम (Foreigner Act) के तहत पहले भी आरोपी रह चुका है। अब पुलिस सुरेश सिंह की शिकायत पर दर्ज मुकदमे के आधार पर उसके बंदूक के लाइसेंस को हमेशा के लिए निरस्त करने की कार्रवाई कर रही है।


मंगलता में हुई इस घटना ने एक बार फिर हथियार लाइसेंस बांटने वाली व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरेश सिंह चम्याल ने तो हिम्मत दिखाकर पुलिस को सच बता दिया, लेकिन सवाल उस सिस्टम से है जिसने एक आपराधिक इतिहास वाले व्यक्ति केा बंदूक का लाइसेंसी तक दे दिया। एसएसपी की त्वरित कार्रवाई काबिल-ए-तारीफ है, लेकिन भविष्य में ऐसे ‘तनावग्रस्त’ शिकारियों को बंदूक मिलने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन की पोल खुलनी जरूरी है।

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