महंगे पेट्रोल-डीजल ने बदली दुनिया की रफ्तार: 2026 में 2.3 करोड़ के पार जाएगी इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री! हर 10 में से 3 गाड़ियां होंगी EV

नई दिल्ली। दुनिया भर में कच्चे तेल के गहराते संकट, पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की गंभीर चिंताओं के बीच…

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नई दिल्ली। दुनिया भर में कच्चे तेल के गहराते संकट, पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की गंभीर चिंताओं के बीच ऑटोमोबाइल बाजार में एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है।

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अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की ताजा जारी रिपोर्ट ‘ग्लोबल ईवी आउटलुक 2026’ के अनुसार, वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के प्रति उपभोक्ताओं का भरोसा बेहद तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि साल 2026 में दुनिया भर में इलेक्ट्रिक कारों की कुल बिक्री 2.3 करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर जाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि इस साल दुनिया में बिकने वाली हर 10 नई कारों में से करीब 3 कारें पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होंगी।

विस्तृत जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की इस विशेष रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े और बाजार की स्थिति इस प्रकार है:

क्यों बढ़ी इलेक्ट्रिक कारों की मांग और क्या हैं मुख्य वजहें?

आईईए की रिपोर्ट के मुताबिक, ईवी बाजार को रफ्तार मिलने के पीछे सबसे बड़ा कारण पारंपरिक ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की बढ़ती कीमतें हैं, जिसने आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है। उपभोक्ता अब ऐसे विकल्पों की तलाश में हैं जो लंबे समय में किफायती साबित हों। इसके अलावा, ईवी में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक बैटरियों की कीमतों में आई भारी गिरावट ने इन गाड़ियों को पहले से कहीं अधिक सस्ता और सुलभ बना दिया है। वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों की सरकारों द्वारा दी जा रही टैक्स छूट, सब्सिडी और कड़े पर्यावरण नियमों ने भी इस उद्योग को बड़ा बूस्ट दिया है।

वैश्विक ईवी बाजार के मुख्य आंकड़े (एक नजर में):

  • 2026 में संभावित ईवी बिक्री: 2.3 करोड़ के पार
  • 2025 में वैश्विक ईवी हिस्सेदारी: 25 प्रतिशत (2 करोड़ से अधिक कारें बिकीं)
  • बाजार में हिस्सेदारी: हर 10 नई कारों में से करीब 3 कारें ईवी होंगी
  • एशिया-प्रशांत क्षेत्र (चीन को छोड़कर) में वृद्धि: 80 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़त
  • 2035 तक सड़कों पर संभावित ईवी की संख्या: 51 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान

शुरुआती मंदी के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया बना नया ‘ईवी हॉटस्पॉट’

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की पहली तिमाही में चीन और अमेरिका के नीतिगत बदलावों के चलते वैश्विक ईवी बिक्री में करीब 8 प्रतिशत की मामूली गिरावट देखी गई थी, लेकिन चीन को छोड़कर पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दर्ज की गई 80 प्रतिशत की भारी ग्रोथ ने बाजार को फिर से संभाल लिया। विशेषकर दक्षिण-पूर्व एशिया इस समय दुनिया का सबसे नया और तेजी से उभरता ‘ईवी हॉटस्पॉट’ बन चुका है। वियतनाम और थाईलैंड जैसे विकासशील देशों में पिछले साल इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री दोगुनी से अधिक दर्ज की गई है, और इन देशों के कुल ऑटो बाजार में ईवी की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चार्जिंग स्टेशनों के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटोमोबाइल कंपनियों द्वारा लगातार बाजार में उतारे जा रहे कम लागत वाले बजट मॉडल्स के कारण साल 2035 तक दुनिया की सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या मौजूदा 8 करोड़ से बढ़कर 51 करोड़ के पार पहुंच जाएगी, जिससे प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी। उत्तराखंड की अन्य मुख्य खबरों के लाइव अपडेट्स के लिए यहाँ क्लिक करें।

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