कल्पना करें आपके पास अपनी उड़ने वाली यानि फ्लाइंग कार हो तो सफर कितना आसान हो जाएगा, यह सपना कई देखते हैं तो अल्मोड़ा के काफलीखान दुनाड़ निवासी रवि टम्टा ने ना केवल सपना देखा बल्कि सपने को अमली जामा भी पहना दिया, उन्होंने फ्लाइंग कार का सफल डेमो दिखा कर वैज्ञानिक सोच का परिचय दिया।
अल्मोड़ा के युवा नवाचारक रवि टम्टा ने कुछ ऐसा ही दावा किया है, रवि का कहना है कि उन्होंने हवा में उड़ने वाला एक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल तैयार किया है।
रवि ने सोशल मीडिया में डेमो को भी डाला उनके मुताबिक इस प्रोटोटाइप का अल्मोड़ा में सफल परीक्षण भी किया गया है. उन्होंने बाकायदा उसको उड़ाकर भी दिखाया है।
सोशल मीडिया पर रवि की यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, इसके बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें बधाई दी है।
रवि टम्टा ने बताया उन्होंने जब अपने घर तक पहुंचने के लिए इस फ्लाइंग व्हीकल में मैप डाला तो परिणाम उनके लिए बेहद खास खास रहा।
उनके मुताबिक जिस दूरी को सड़क मार्ग से तय करने में करीब 40 मिनट लगते हैं वही दूरी हवा के रास्ते इस वाहन से करीब 12 मिनट में पूरी की जा सकती थी. रवि का कहना है कि परीक्षण के दौरान इस अनुभव ने उनके उस सपने को हकीकत में बदलने का एहसास कराया जिस पर वह लंबे समय से काम कर रहे थे।
रवि का कहना है कि तकनीक अभी शुरुआती दौर में है। आने वाले समय में व्यक्तिगत उड़ने वाले वाहन आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन सकते हैं।
उनका सपना है कि जिस तरह आज लगभग हर घर में कार या दोपहिया वाहन देखने को मिलता है उसी तरह भविष्य में पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल भी लोगों की पहुंच में हो।
रवि के अनुसार यह सिर्फ एक मशीन नहीं है बल्कि उनके लंबे संघर्ष और प्रयोगों का नतीजा है. उन्होंने कई वर्षों तक व्यक्तिगत हवाई परिवहन की संभावना पर काम किया है. उन्होंने इस पर अलग-अलग स्तर पर तकनीकी प्रयोग किए हैं। रवि का कहना है कि प्रोटोटाइप की पहली सफल उड़ान उनके लिए उस सपने की पहली बड़ी उपलब्धि है।
उनका दावा है कि यह भारत में बनाया गया पहला Personal Flying Vehicle है। उनका विजन है कि भविष्य में ऐसी तकनीक को और विकसित किया जाए जिससे लोग छोटी दूरी के सफर के लिए सड़क के साथ-साथ हवाई रास्ते का भी इस्तेमाल कर सकें।
रवि भी मानते हैं कि इस वाहन को उड़ाने और आगे विकसित करने के लिए कई परमिशन और औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी. यानी फिलहाल उनका उपक्रम HAPIDA SKYNEX को एक प्रोटोटाइप और परीक्षण स्तर के नवाचार के तौर पर देखा जा रहा है।
रवि टम्टा के लिए यह पहला प्रयोग नहीं है. वह इससे पहले भी अपने अलग-अलग तकनीकी नवाचारों को लेकर चर्चा में रहे हैं. रवि की बनाई हुई स्टिक (डंडा) उत्तराखंड फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में भी इस्तेमाल हो रही है. इसके साथ ही इसको ऑनलाइन ऑर्डर भी मिल रहे हैं।
बचपन से ही होनहार रवि टम्टा ने बाहरवीं उत्तीर्ण करने के बाद नई-नई मशीनों के आविष्कार में जुट गये। उन्होंने बताया कि साल 2014 में उन्होंने पहली बार एक चार्जेबल जूता बनाया था।
जिसको पहनकर चलने से मोबाइल फोन चार्ज होता है। वहीं एक इलेक्ट्रोलाइट पंप बनाया, इसके द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को एक मिनट में फुल चार्ज किया जा सकता है।

