ईरान अमेरिका तनाव के बीच गैस की कमी की वजह से रसोई घरों में दिक्कत हो रही है। देश में एलपीजी का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है और शहरों में हड़कंप भी मचा हुआ है। ऐसे में हालात इतने खराब हैं कि सप्लाई न होने की वजह से कई जगहों पर होटल और रेस्टोरेंट्स बंद करने पड़े हैं।
गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। इस बीच सरकार ने जनता को बड़ी राहत देते हुए आश्वासन दिया है कि सिलेंडर की कमी नहीं होने दी जाएगी।
वही पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह कह दिया है की बुकिंग के महज ढाई दिन के भीतर सिलेंडर उपभोक्ताओं तक पहुंच जाएगा। सरकार ने लोगों से पुरजोर अपील की है कि वे घबराहट में आकर बेवजह सिलेंडर बुक न करें और न ही इनका स्टॉक जमा करें। सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी के उत्पादन में 25% तक की तेजी लाई गई है ताकि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहे।
बताया जा रहा है कि पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी (मार्केटिंग एंड ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत अपनी जरूरत का 60 फीसदी एलपीजी आयात करता है, जिसका 90 फीसदी हिस्सा होर्मुज की खाड़ी से आता है। युद्ध के कारण यह रूट प्रभावित हुआ है।
इससे निपटने के लिए 8 मार्च को सभी रिफाइनरीज को आदेश दिया गया कि वे एलपीजी का उत्पादन अधिकतम स्तर पर ले जाएं। फिलहाल अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर नॉन-डोमेस्टिक गैस दी जा रही है।
वहीं अगर कीमतों की बात की जाए तो सरकार ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जुलाई 2023 से एलजी के दाम 41% तक बड़े हैं लेकिन भारत में उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए कीमत कम हुई है। दिल्ली में सिलेंडर की कीमत फिलहाल 913 रुपए बढ़ गई है वही उज्ज्वला योजना के तहत 613 रुपए में यह सिलेंडर दिया जा रहा है।
सरकार कीमतों का एक बड़ा बोझ उठा रही है ताकि आम आदमी की जेब पर ज्यादा असर न पड़े।
नेचुरल गैस और नए इंतजाम देश में नेचुरल गैस की रोजाना खपत 189 मिलियन एमएससीएमडी है, जिसमें से करीब आधी घरेलू स्तर पर तैयार होती है। आयात में आई कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने वैकल्पिक रास्ते तलाश लिए हैं।
गैस कंपनियों ने नए स्रोतों से कार्गो खरीदे हैं और दो बड़े एलएनजी (LNG) कार्गो भारत की ओर रवाना हो चुके हैं, जिससे जल्द ही सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।
