हादसों को दावत दे रहा रिणबिछुल-रसैपाटा मार्ग

दर्जनों गांवों को जोड़ने वाले 11 किमी लंबे मार्ग की सुध लेने वाला कोई नहीं: क्षेत्रवासियों में रोष पिथौरागढ़। उदासीनता के चलते रिण-बिछुल-रसैपाटा मोटरमार्ग खस्ताहाल…

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दर्जनों गांवों को जोड़ने वाले 11 किमी लंबे मार्ग की सुध लेने वाला कोई नहीं: क्षेत्रवासियों में रोष


पिथौरागढ़। उदासीनता के चलते रिण-बिछुल-रसैपाटा मोटरमार्ग खस्ताहाल है। ऐसे में इस मार्ग पर वाहनों का चलना खतरे से खाली नहीं है। मार्ग पर कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं तो कुछ जगह स्कबर का ऊपरी हिस्सा टूटकर सीधे दुर्घटनाओं को दावत दे रहा है। लगभग 11 किलोमीटर लंबे इस मार्ग से दर्जनों गांव जुड़े हैं और सैकड़ों लोग इस मार्ग से आवाजाही करते हैं, खस्ताहाल मार्ग को दुरुस्त न किये जाने से क्षेत्रवासियों में रोष है। क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार ने जल्द मार्ग की दशा न सुधारे जाने पर लोगों के साथ आंदोलन की चेतावनी दी है।
जिला मुख्यालय से करीब 17 किमी दूर सुवालेख के पास से रिणुबिछुल-रसैपाटा मोटर मार्ग का शिलान्यास 15 फरवरी 2009 को तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने किया था। उस समय यह क्षेत्र कनालीछीना विधानसभा सीट में पड़ता था और तत्कालीन विधायक मयूख महर के प्रयासों से 11 किमी मोटर मार्ग की स्वीकृति मिली थी। मार्ग का निर्माण लोनिवि पिथौरागढ़ द्वारा किया गया था और तब मार्ग पर करीब 3 किमी तक डामरीकरण भी किया गया, लेकिन चौघर से पंगरोली तक मोटर मार्ग का 8 किमी हिस्सा अब तक कच्चा ही है। तब से अब तक इस मार्ग की हालत दिनो-दिन खस्ताहाल होती गई है। जगह-जगह गड्ढों और स्कबर टूटने से इस मार्ग पर दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। रिण-बिछुल क्षेत्र के भुप्पी चंद, धर्मेंद्र बसेड़ा, आनंद, रसैपाटा निवासी रमेश कापड़ी और त्रिभुवन सिंह का कहना है जब से सड़क बनी है तब से कोई इसको देखने वाला नहीं है। जिससे लोगों को आवाजाही में काफी परेशानी होती है। इस मार्ग पर कई टैक्सी वाहन चलते हैं। खस्ताहाल मार्ग के कारण वाहनों में अत्यधिक टूट-फूट होने से वाहन स्वामी भी परेशानी हैं। वहीं जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार का कहना है यदि शीघ्र मार्ग की हालत नहीं सुधारी गई तो क्षेत्रवासियों के साथ आंदोलन किया जाएगा।

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