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चारधाम यात्रा पर जाना इतना आसान नहीं, महज चार दिनों में 7 श्रद्धालुओं की हुई मौत, इन बातों का रखें ध्यान

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के लिए देश विदेश से भक्त दर्शन करने को पहुंच रहें हैं। यूपी, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र आदि राज्यों की तीर्थ यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। वही यात्रा के चार दिन के अंतराल में ही दोनों धामों में अब तक सात श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें हार्ट अटैक और बेहोशी के कारण यात्रियों की मौत हुई है। इनमें पांच श्रद्धालुओं की मौत यमुनोत्री धाम यात्रा पर हुई है।

एसपी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार कपाटोद्घाटन के पहले दिन ही यमुनोत्री में तीन श्रद्धालुओं की मौत हुई। जिनकी मौत हार्ट अटैक व बेहोशी आने से से मौत हुई।जबकि 12 मई को यमुनोत्री यात्रा पर तीन लोगों की अटैक से मौत हो गई। वही सोमवार को एक 72 वर्षीय बुजुर्ग अचेत अवस्था में पाए जाने पर मृत मिला।मंगलवार को गंगोत्री धाम में 76 वर्षीय गोवा निवासी महिला ने अस्पताल पहुंचते ही शोभा ने दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि चारधाम यात्रा में यात्रियों की बढ़ती संख्या एक चुनौती के रूप में सामने आई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य जांच से लेकर तमाम सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि यात्रा रूट पर बड़ी संख्या में डॉक्टरों की तैनाती की गई है और श्रीनगर में हार्ट रोगियों के लिए कैथ लैब भी बनाई जा रही है। चारधाम के लिए तीर्थयात्री अपनी पूरी तैयारी के साथ जाएं अन्यथा पहाड़ों के सफर के दौरान कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। चारधाम यात्रा में वाहनों के दबाव के चलते कुछ स्थानों पर ट्रैफिक जाम और अचानक बारिश से रास्ते बंद होने की आशंका बनी रहती है।यात्रा पर आने से पहले आप इन बातो का ध्यान जरूर रखें जैसे यात्रा से पहले पंजीकरण जरूर कराएं और सही मोबाइल नंबर दें। धामों में दर्शन को टोकन जरूर प्राप्त करें।

अपने साथ गरम कपड़े, छाता, रेनकोट रखें। रास्ता बंद होने की स्थिति में चने, बिस्कुट, ड्राई फ्रूट, पानी साथ रखें। कोई दवाई लेते हैं तो पर्याप्त मात्रा में दवा साथ रखें। यात्रा पड़ावों पर विश्राम करते हुए आगे बढ़ें, ताकि जलवायु के अनुकूल हो सकें। यात्रा रूट पर चिकित्सा जांच कराएं। मौसम की अपडेट लेते रहें। लंबी यात्रा हो तो टेंट साथ रखें। वही बता दें कि आपको ऑनलाइन पंजीकरण न होने पर ऑफलाइन पंजीकरण के लिए कतार में जूझना पड़ेगा।

पंजीकरण न होने पर होटल, टैक्सी, हेली बुकिंग को करवाना पड़ सकता है निरस्तहोटल की बुकिंग न होने पर ठंड में खुले आसमान के नीचे बितानी पड़ सकती है रातयात्रा रूट पर अपने साथ खाने-पानी का इंतजाम रखेंअस्वस्थ होने के दौरान यात्रा करने पर अधिक ऊंचाई में बिगड़ सकता है स्वास्थ्यनिजी वाहन से यात्रा करने पर पार्किंग की समस्या से सामनाधाम में टोकन या स्लॉट बुक न होने पर दर्शन को लंबा इंतजार।