जंगलों की आग पर बड़ी कार्यवाही, अल्मोड़ा में दर्ज हुआ पहला मुकदमा

First FIR Lodged on Forest Fire in almora अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट क्षेत्र में जंगलों में लगी आग के मामलों पर सख्ती दिखाते हुए प्रशासन…

First FIR Lodged on Forest Fire in almora

अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट क्षेत्र में जंगलों में लगी आग के मामलों पर सख्ती दिखाते हुए प्रशासन ने पहला मुकदमा दर्ज कर लिया है। तल्ली मिरई के जंगल में लगी आग के बाद अज्ञात के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज हुआ है। प्रशासन ने कहा है कि लापरवाही के कारण आग लगने या आग लगाने की साजिश करने वालों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

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पहली बार जंगल की आग को लेकर दर्ज हुआ मुकदमा
अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट क्षेत्र में जंगलों में आग लगाने के मामलों को लेकर प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है। तहसील द्वाराहाट के तल्ली मिरई गांव के जंगल में आग लगने की घटना पर प्रशासन ने पहली बार मुकदमा दर्ज कराया है। जानकारी के मुताबिक 24 अप्रैल 2025 की शाम तल्ली मिरई और किरौली ग्राम के जंगलों में आग भड़क गई थी। इस मामले में अज्ञात के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 326(F) BNS और भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26(1)(b) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।


जंगलों की आग को लेकर पहले से ही था सख्त अलर्ट
उपजिलाधिकारी द्वाराहाट सुनील कुमार राज ने बताया कि जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय ने पहले ही जनता को सचेत कर दिया था कि जंगलों में जानबूझकर या लापरवाही से आग लगाने की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाएगा। इसी चेतावनी के बाद से प्रशासन और वन विभाग लगातार मिलकर निगरानी कर रहे हैं। जगह-जगह टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि आगजनी की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई हो सके।


सोशल मीडिया के जरिये भी चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
वन विभाग और तहसील प्रशासन वनाग्नि की घटनाओं की निगरानी के साथ ही सोशल मीडिया के जरिए भी जागरूकता फैला रहे हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि अपनी निजी जमीन पर खरपतवार जलाकर नष्ट न करें, क्योंकि इससे आग तेजी से फैलकर जंगलों तक पहुंच सकती है। कई बार निजी खेतों से लगी आग जंगल में तबाही मचा देती है, इसलिए सावधानी बेहद जरूरी है।


आग लगाने वालों पर होगी कड़ी कार्यवाही
उपजिलाधिकारी सुनील कुमार राज ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति जंगल में आग लगाने की घटना में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल पाया गया, तो उसके खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम और भारतीय वन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई होगी। प्रशासन की इस सक्रियता से साफ है कि अब जंगलों को बचाने के लिए कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।