अटल बिहारी वाजपेयी सियासत में लाए थे बीसी खंडूड़ी को, सैन्य अनुशासन से राजनीति में स्थापित किए सुशासन के मानक

देहरादून। उत्तराखंड के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन से आज पूरा देश और प्रदेश मर्माहत है । देहरादून के मैक्स…

bc khanduri
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देहरादून। उत्तराखंड के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन से आज पूरा देश और प्रदेश मर्माहत है । देहरादून के मैक्स हॉस्पिटल में उन्होंने अंतिम सांस ली, जिसके बाद उनके लंबे और बेदाग राजनीतिक जीवन के साथ-साथ देश सेवा में दिए गए योगदान को शिद्दत से याद किया जा रहा है । भुवन चंद्र खंडूड़ी को सक्रिय राजनीति में लाने का पूरा श्रेय देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को जाता है।अटल बिहारी वाजपेयी की पारखी नजरों के कारण ही वे सियासत के मैदान में उतरे और फिर अपनी कड़क कार्यशैली व बेजोड़ फैसलों के दम पर राजनीति की बुलंदियों को छुआ ।

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फौजी से मुख्यमंत्री बनने तक का सफर

1 अक्टूबर 1934 को जन्मे भुवन चंद्र खंडूड़ी ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय सेना से की थी, जहां उन्होंने एक बेहद अनुशासित सैन्य अधिकारी के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई । सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने जनता की सेवा को माध्यम बनाकर राजनीति की ओर रुख किया ।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़कर उन्होंने अपनी बेदाग व ईमानदार छवि और सख्त प्रशासनिक रवैये के कारण बहुत जल्द राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमा ली । उत्तराखंड राज्य बनने के बाद उनका राजनीतिक कद लगातार ऊंचाई छूता गया । वे साल 2007 में पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने और आते ही सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाकर व्यवस्था को हिला दिया ।

उनके इस पहले कार्यकाल में जनता के बीच “खंडूड़ी है जरूरी” का नारा गूंज उठा, जो उनकी साफ-सुथरी छवि का सबसे बड़ा प्रतीक बना । हालांकि, राजनीतिक समीकरणों और 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा, लेकिन उनकी लोकप्रियता के मद्देनजर 2011 में उन्हें दोबारा सूबे की कमान सौंपी गई ।

पहाड़ के विकास के लिए लिए थे ऐतिहासिक फैसले

भुवन चंद्र खंडूड़ी को उत्तराखंड में उनके साहसिक फैसलों के लिए हमेशा याद किया जाएगा । उन्होंने अपनी सैन्य पृष्ठभूमि के प्रभाव के चलते सरकारी कामकाज में अनुशासन और जवाबदेही तय की । उत्तराखंड की जमीनों को बाहरी अतिक्रमण से बचाने के लिए उन्होंने कड़े भूमि कानून लागू किए, पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर का जाल बिछाया तथा पूर्व सैनिकों व उनके परिवारों के कल्याण के लिए कई अभूतपूर्व योजनाएं शुरू कीं ।

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में मनवाया लोहा

खंडूड़ी केवल उत्तराखंड तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी उनका कद बेहद मजबूत था । वे केंद्र सरकार में सड़क परिवहन मंत्री के रूप में काम कर चुके थे और इस दौरान उन्होंने देश में राष्ट्रीय राजमार्गों और बड़ी सड़क परियोजनाओं के विस्तार में मील का पत्थर साबित होने वाली भूमिका निभाई । उनके बारे में यह मशहूर था कि वे फैसले लेने में कभी कशमकश में नहीं रहते थे और जो भी निर्णय लेते थे, उसे पूरी कड़ाई के साथ जमीन पर उतारते थे ।

विपक्ष भी करता था सादगी और ईमानदारी का सम्मान

आज के दौर में जहां नेताओं पर तमाम तरह के आरोप लगते हैं, वहीं भुवन चंद्र खंडूड़ी का पूरा राजनीतिक जीवन बेदाग रहा । उन्होंने हमेशा सादगीपूर्ण जीवन जिया और व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर सार्वजनिक कल्याण को आगे रखा । यही कारण था कि विपक्षी दलों के नेता भी उन्हें बेहद सम्मान की नजर से देखते थे । ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों की जनता उन्हें एक ऐसे सच्चे मसीहा के रूप में देखती थी जो उनके जमीनी मुद्दों को समझता था । उनके निधन से उत्तराखंड की राजनीति का एक ऐसा स्वर्णिम युग समाप्त हो गया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए ईमानदारी, सुशासन और अनुशासन की एक महान पाठशाला बना रहेगा ।

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