प्रदेश की सियासत में आज एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भाजपा से 6 दिग्गज नेताओं ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ले ली। एक तरफ दिल्ली में कांग्रेस उत्तराखंड के 6 दिग्गज नेताओं को शामिल कर अपनी ताकत बढ़ाने का दावा कर रही थी, तो वहीं दूसरी ओर पार्टी में असंतोष भी खुलकर दिखने लगा। बात हो रही है रूद्रपुर की जहां कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व पालिकाध्यक्ष मीना शर्मा ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया।
आज दिन में रुद्रपुर के पूर्व भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल समेत कई बड़े नेताओं ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। कांग्रेस नेताओं ने इसे भाजपा सरकार के प्रति जनता के गुस्से और कांग्रेस के प्रति बढ़ते विश्वास का परिणाम बताया था। नए नेताओं की एंट्री को पार्टी की ताकत बढ़ाने वाला माना जा रहा था।
पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी आई सामने
लेकिन,रुद्रपुर से आई बड़ी खबर ने कांग्रेस के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। जैसे ही राजकुमार ठुकराल कांग्रेस में शामिल हुए, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष एवं कांग्रेस नेत्री मीना शर्मा ने पार्टी पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस कदम ने पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी को उजागर कर दिया है।
अंदरूनी खींचतान और असंतोष
इस घटनाक्रम से साफ है कि कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान और असंतोष बढ़ रहा है। नए नेताओं की एंट्री से जहां एक तरफ ताकत बढ़ रही है, वहीं पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी उभर रही है। पुराने कार्यकर्ता महसूस कर रहे हैं कि उनकी मेहनत और वफादारी को नजरअंदाज किया जा रहा है और नए नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
चुनावी समीकरणों पर असर
उत्तराखंड में चुनावी माहौल के बीच ऐसे घटनाक्रम आने वाले समय में बड़े राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती है। क्या कांग्रेस नेतृत्व इस असंतोष को शांत कर पाएगा और पार्टी को एकजुट रख पाएगा? यह एक बड़ा सवाल है।

