अल्मोड़ा-उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की हड़ताल 10 वें दिन भी जारी रही।
इस दौरान आयोजित धरना-प्रदर्शन में लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग और ग्रामीण निर्माण विभाग सहित विभिन्न घटक संघों के डिप्लोमा इंजीनियर्स शामिल हुए।
अपनी मांगों को लेकर आक्रोशित अभियंताओं ने एक बैठक कर 27 सूत्रीय मांगों के पूर्ण होने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया।
सबने एक स्वर में कहा कि हड़ताल के चलते विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
शक्ति सदन में हुई सभा में महासंघ के विभिन्न घटक संघों लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, ग्रामीण निर्माण विभाग, लघु सिंचाई विभाग. आवास विभाग, कृषि विभाग, पेयजल निगम, जल संस्थान, जिला पंचायत आदि विभागों के डिप्लोमा इंजीनियर्स प्रतिभाग किया। बैठक में महासंघ की मांगों (समस्याओं को पूर्ण होने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल को जारी रखने का ऐलान किया , जिसके कारण विभिन्न निर्माण कार्य एवं आवश्यक सेवायें प्रभावित होंगे, इंजीनियरों ने यह भी कहा गया कि इस हेतु इंजीनियर्स की कोई भी जिम्मेदावरी नहीं होगी।
इंजीनियरों के हड़ताल में जाने से विभिन्न मार्गों के डामरीकरण, पेयजल लाइनों का निर्माण, राजकीय भवनों के निर्माण, सुरक्षात्मक कार्य, सौंदर्यकिरण आदि के कार्य पूर्ण रूप से बंद हो गये हैं।
पहली अप्रैल से पेयजल निगम एवं जल संस्थान के इंजीनियरों के हडताल में जुड़ने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित होगी तथा ऊर्जा निगम के इंजीनियरों के हड़ताल में जुड़ने से विद्युत सप्लाई एवं उत्पादन कार्य प्रभावित होंगे।
बैठक की अध्यक्षता विरेन्द्र सिंह मेहता द्वारा की गई।
प्रमुख मांगों में 10 वर्ष में प्रथम एसीपी के तहत 5400 ग्रेड पे, 16 वर्ष में 6600 और 26 वर्ष में 8700 ग्रेड पे, अभियंत्रण विभागों में न्यूनतम तीन पदोन्नति, पेयजल एवं जल संस्थान का राजकीयकरण, पुरानी पेंशन बहाली, आईटी भत्ता, फील्ड स्टाफ की नियुक्ति और गैर तकनीकी कार्यों से मुक्ति शामिल हैं।
अभियंताओं ने कहा कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। धरना-प्रदर्शन में दीपक मटियाली, ललित शर्मा, रिनी पांडे, हिमांशु जोशी, जीएस मेहरा, ललित मोहन बिष्ट, सूरज रावत, हितांशी नैलवाल, प्रेमा पाटनी, कमलेश तिलारा, नितेश रावत, स्वीटी पटवाल, मोनिका टाकुली, नेहा लटवाल, शमशाद अंसारी, हर्षिता सुयाल सहित अन्य मौजूद रहे।

