उत्तराखंड: अंतिम पग पार कर भारतीय सेना(Indian Army) में अफसर बने 333 जांबाज, मुंह पर मास्क पहन परेड में शामिल हुए कैडेट

Uttarakhand: 333 bravehearts became officers in the Indian Army देहरादून, 13 जून 2020उत्तराखंड के देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से कड़े प्रशिक्षण के बाद…

Uttarakhand: 333 bravehearts became officers in the Indian Army

देहरादून, 13 जून 2020
उत्तराखंड के देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से कड़े प्रशिक्षण के बाद 423 कैडेट्स पास आउट हुए. जिसमें 333 कैडेट्स भारतीय थल सेना (Indian army) का हिस्सा बनें. इसके अलावा 90 विदेशी कैडेट्स भी अपने देश की सेना में शामिल हुए. परेड में सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने बतौर रिव्यूइंग ऑफिसर भाग लिया.

सुबह 6 बजकर 42 मिनट पर कैडेट परेड स्थल पहुंचे और परेड शुरू हुई. डिप्टी कमांडेंट ने सबसे पहले परेड की सलामी ली. ठीक 7 बजकर 5 मिनट पर कमांडेंट ले.ज. जयवीर सिंह नेगी ने परेड की सलामी ली. जिसके बाद भारतीय सेना के चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवाना (Manoj Mukund Narwana)ने 423 युवा अफसरों की पासिंग आउट परेड की समीक्षा की. चीफ जनरल की मौजूदगी में चैटवुड हॉल के ड्रिल स्क्वायर पर कदमताल के बाद कैडेटों को भारतीय सेना की शपथ दिलाई.

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इस बार भी उत्तर प्रदेश के सबसे अधिक 66 कैडेट पास आउट हुए. उत्तराखंड से 31 कैडेट सेना में अफसर बनें. उत्तराखंड-बिहार संयुक्त रूप से तीसरे नंबर पर है. हरियाणा 39 कैडेट के साथ दूसरे नंबर पर रहा.

कड़े प्रशिक्षण में खरा उतरने के बाद 423 जांबाज कैडेट्स ने आज आईएमए में अंतिम पग भरा. जिसमें 333 जांबाज भारतीय थल सेना का हिस्सा बने. जबकि 90 युवा सैन्य अधिकारी 9 मित्र देशों अफगानिस्तान, तजाकिस्तान, भूटान, मॉरीशस, मालद्वीव, फिजी, पपुआ न्यू गिनी, श्रीलंका व वियतनाम की सेना का अभिन्न अंग बने.

मुंह पर मास्क पहनकर की परेड

सभी जांबाज देश रक्षा की सौगंध के साथ अपने देशों की कमान संभालने को तैयार हो गए हैं. ऐसा पहली बार है जब कैडेट बिना अपने माता-पिता और रिश्तेदारों के अंतिम पग भरा. परेड भी कैडेट मुंह पर मास्क पहनकर की गई.  

कंधों पर सितारे सजाने की इच्छा नहीं हुई पूरी

पहली बार ऐसा हुआ कि आईएमए की पासिंग आउट परेड (पीओपी) के दौरान ड्रिल स्क्वायर पर सीना चौड़ा किए कदमताल करके अपने बेटे को देखने और उसके कंधों पर पीप्स (सितारे) सजाने की माता-पिता की इच्छा पूरी नहीं हुई. ज्ञात हो कि कोरोना संक्रमण की वजह से इस बार पीओपी में आईएमए की ओर से किसी भी कैडेट्स के परिजनों को बुलावा नहीं भेजा गया था.