उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने किया पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरने और पूंजीवादी लूट के खिलाफ संघर्ष तेज करने का ऐलान
अल्मोड़ा। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी की अल्मोड़ा में आयोजित आम बैठक में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कार्यकर्ताओं, छात्र-युवाओं, महिला कार्यकर्ताओं और जनसरोकारों से जुड़े लोगों ने प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया।
बैठक में कहा गया कि उत्तराखंड की जनता पिछले 26 वर्षों से भाजपा और कांग्रेस की बारी-बारी की सरकारों की नीतियों का खामियाजा भुगत रही है। अब समय आ गया है कि जनता इन दोनों राष्ट्रीय दलों की राजनीति का विकल्प तैयार करे।
पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी ने कहा कि उत्तराखंड की जनता ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को पर्याप्त अवसर दिए, लेकिन दोनों दलों ने राज्य निर्माण की मूल भावना के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को पूंजीपतियों के हवाले किया जा रहा है, जबकि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पलायन जैसे बुनियादी सवाल लगातार बदहाल हैं।
उन्होंने कहा कि अब जनता को केवल सरकार बदलने की नहीं, बल्कि राजनीति की दिशा बदलने की जरूरत है। वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तराखंड के लिए निर्णायक होगा और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी पूरी राजनीतिक ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और मोहल्ले-मोहल्ले जाकर जनता को संगठित करने का आह्वान किया।
पार्टी के केंद्रीय संयोजक पी.सी. तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड केवल सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण, स्वावलंबी और जनपक्षीय व्यवस्था के निर्माण के लिए बना था। लेकिन 26 वर्षों में भाजपा और कांग्रेस ने राज्य की अवधारणा को सत्ता और संसाधनों की बंदरबांट तक सीमित कर दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने अपने गठन से ही राज्य के मूल सवालों पर बिना किसी समझौते के संघर्ष किया है और आज जनता के बीच एक विश्वसनीय क्षेत्रीय राजनीतिक विकल्प के रूप में अपनी जगह बना रही है।
पार्टी के केंद्रीय प्रधान महासचिव नरेश नौड़ियाल ने कहा कि देश में युवाओं और आम जनता के बीच बढ़ता असंतोष इस बात का संकेत है कि नफरत और भावनात्मक मुद्दों के सहारे जनता के वास्तविक सवालों को हमेशा दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवालों से बचने के लिए समाज को बांटने की राजनीति अब ज्यादा समय तक नहीं चल सकती।
बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों, जमीन और सार्वजनिक संपत्तियों पर बढ़ते कॉरपोरेट कब्जे के खिलाफ भाजपा-कांग्रेस की सरकारों ने जनता के हितों की पर्याप्त रक्षा नहीं की है। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड को केवल पर्यटन और जमीन के बाजार के रूप में देखने की बजाय स्थानीय लोगों के अधिकार, आजीविका और पर्यावरणीय सुरक्षा को विकास का आधार बनाया जाना चाहिए।
बैठक में पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अल्मोड़ा जिले में संगठन के व्यापक विस्तार, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने, युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने तथा जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आंदोलन और जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया।
कार्यक्रम को पार्टी के वरिष्ठ नेता एडवोकेट मोहनलाल वर्मा, रतन सिंह, मोरिया, श्रीमती आनंदी वर्मा, एडवोकेट नानक, एडवोकेट भावना जोशी, रवीना, मोहम्मद साकिब वसीम, श्रमिक नेता गिरधारी लाल, गिरधारी कांडपाल, जगदीश मुवानी, दीपांशु पांडे, सोनी, विनीता, बसंत खानी, प्रकाश जोशी सहित अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया।
बैठक में बड़ी संख्या में छात्र, युवा, महिला, श्रमिक और आम नागरिक शामिल हुए। इनमें मनोज पांडे, ममता बिष्ट, हेम पांडे, सुरेंद्र, हीरा देवी, पान सिंह नेगी, राजू, विधि देवी, लालसा, वल्लभ पांडे, धन सिंह, धीरेंद्र, मोहन पंत, एडवोकेट जीवन, जैसी, सुनील सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

