उत्तरा न्यूज डेस्क: भीषण गर्मी के मौसम में शरीर से पसीना अधिक निकलता है जिससे पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में सही समय पर और सही मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी हो जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि दिनभर में कितनी बार पानी पीना चाहिए और शरीर के लिए कितना पानी पर्याप्त है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस पर बहुत ही अहम सलाह दी है।
शरीर खुद देता है पानी की जरूरत का संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार शरीर प्यास के जरिए लगातार संकेत देता है कि उसे पानी की जरूरत है। अगर होंठ या गला सूखने लगे या पेशाब का रंग गहरा पीला हो जाए तो यह साफ संकेत है कि शरीर में पानी की कमी हो रही है। ऐसे में बिना किसी देरी के तुरंत पानी पी लेना चाहिए। पानी की मात्रा हर व्यक्ति की जीवनशैली उम्र और शारीरिक गतिविधि पर भी निर्भर करती है। धूप में ज्यादा मेहनत करने वालों को अधिक पानी चाहिए जबकि एसी वाले वातावरण में रहने वालों को अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता होती है।
गर्मी में कब और कैसे पिएं पानी
भीषण गर्मी में पानी पीने का कोई सख्त नियम या समय तो नहीं है लेकिन कुछ अच्छी आदतें शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती हैं। घर से बाहर निकलने से पहले एक गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। व्यायाम या जिम करने से पहले और उस दौरान थोड़ा थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए। खाने से लगभग आधा घंटा पहले और बाद में पानी पीना फायदेमंद है। लंबे समय तक प्यास लगने का इंतजार करने के बजाय हर एक या दो घंटे में थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए। एक बार में बहुत अधिक पानी पीने के बजाय थोड़ा थोड़ा करके घूंट घूंट पानी पीना स्वास्थ्य के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
दिनभर में कितना पानी पीना है जरूरी
सामान्य तौर पर गर्मी के मौसम में एक स्वस्थ व्यक्ति को लगभग दो से तीन लीटर पानी की जरूरत होती है। पुरुषों के लिए यह मात्रा लगभग तीन लीटर तक हो सकती है जबकि महिलाओं के लिए दो से ढाई लीटर पानी पर्याप्त माना जाता है। वहीं बच्चों के लिए यह जरूरत उनकी गतिविधियों के आधार पर लगभग एक से डेढ़ लीटर तक होती है। हालांकि अगर किसी व्यक्ति को किडनी या हृदय संबंधी कोई गंभीर बीमारी है तो उन्हें पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही तय करनी चाहिए।
भीषण गर्मी में कितने घंटे बाद पानी पीना चाहिए ,क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स
उत्तरा न्यूज डेस्क: भीषण गर्मी के मौसम में शरीर से पसीना अधिक निकलता है जिससे पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा काफी बढ़ जाता…



