यूपी में अंतिम मतदाता सूची जारी, एसआईआर के बाद 2 करोड़ नाम कटे, अब बचे 13.39 करोड़ वोटर

उत्तर प्रदेश में 166 दिनों तक चली विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद शुक्रवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची…

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उत्तर प्रदेश में 166 दिनों तक चली विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद शुक्रवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इस लंबी और गहन छंटनी प्रक्रिया के बाद प्रदेश में 2 करोड़ से ज्यादा (2.05 करोड़) मतदाताओं के नाम कट गए हैं और अब कुल मतदाताओं की संख्या 13 करोड़, 39 लाख, 84 हजार 792 रह गई है।

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ये रहे पुरुष और महिला मतदाताओं के आंकड़े


प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान मतदाता सूची में 54.54 प्रतिशत पुरुष और 45.46 प्रतिशत महिला मतदाता हैं। आंकड़ों की बात करें तो पुरुष मतदाताओं की संख्या 7 करोड़, 30 लाख, 71 हजार 61 है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 6 करोड़, 9 लाख, 9 हजार 525 है। वहीं, प्रदेश में तृतीय लिंग के 4 हजार 206 मतदाता हैं और 18 से 19 आयुवर्ग के युवा मतदाताओं की कुल संख्या 17 लाख, 63 हजार 360 है।


कम हुए 2 करोड़ से ज्यादा वोटरो के नाम गायब
गौरतलब है कि 27 अक्टूबर 2025 को फ्रीज की गई मतदाता सूची में प्रदेश में 15.44 करोड़ मतदाता थे। लेकिन एसआईआर की लंबी प्रक्रिया के दौरान हुई जांच में 2.05 करोड़ नाम कम हो गए। हालांकि, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार 6 जनवरी को जारी की गई मसौदा सूची के मुकाबले इस अंतिम सूची में कुल 84 लाख, 28 हजार 767 नए मतदाताओं की वृद्धि भी हुई है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के नाम अभी भी छूट गए हैं, वे फॉर्म 6 भरकर मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं।


इन पांच जिलों में बढ़े सबसे ज्यादा मतदाता
अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, प्रयागराज में मतदाताओं की संख्या में सबसे अधिक 3 लाख, 29 हजार 421 की वृद्धि हुई है। इसके बाद लखनऊ में 2 लाख, 85 हजार 961, बरेली में 2 लाख, 57 हजार 920, गाजियाबाद में 2 लाख, 43 हजार 666, और जौनपुर में 2 लाख, 37 हजार 590 नए मतदाता बढ़े हैं।


मसौदा सूची के बाद आए थे लाखों दावे
बता दें कि इससे पहले 6 जनवरी को 12.55 करोड़ मतदाताओं की मसौदा सूची जारी की गई थी, जिस पर 6 मार्च तक दावे और आपत्तियां मांगी गई थीं। इस दौरान नाम शामिल करने के लिए 86.69 लाख लोगों ने फॉर्म-6 भरा, जबकि नाम कटवाने के लिए 3.18 लाख लोगों ने फॉर्म-7 भरा था। चुनाव आयोग के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में 1.04 करोड़ लोगों को पारिवारिक मिलान न होने के कारण नोटिस दिया गया था, जबकि 2.22 करोड़ मामलों में तार्किक विसंगतियां पाई गई थीं जिसके बाद अंतिम सूची तैयार की गई है।

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