विगत 20 वर्ष से कर रहे राज्य भर में आंदोलन पर आंदोलन
ललित मोहन गहतोड़ी
चंपावत। विगत दो दशक से नौकरी पेंशन सहित तीन सूत्रीय मांगों को लेकर राज्य भर में बेरोजगार गुरिल्ला स्वयं सेवक आंदोलनरत हैं। एसएसबी के यह प्रशिक्षित गुरिल्ला अपनी मांगों को लेकर सीधे पीएम से मिलने जा रहे हैं। इस दौरान बेरोजगार गुरिल्ला संगठन की ओर से सीधे प्रधानमंत्री मोदी तक अपनी बात रखने की रणनीति पर विचार मंथन चल रहा है।
रोजगार के लिए भटक रहे इन प्रशिक्षित गुरिल्लों का कहना है कि लगभग डेढ़ माह के गहन सैन्य प्रशिक्षण के बाद उन्हें 20 वर्ष से अब तक खाली हाथ रखा गया है। इसको लेकर अप्रैल माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देहरादून आगमन पर गुरिल्ला स्वयं सेवक संगठन का एक शिष्टमंडल सीधे उनसे मिलकर अपनी दो दशक पुरानी तीन सूत्रीय मांग फिर से दोहराएंगे।
इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से रणनीति तैयार की जा रही है। गुरिल्लों का कहना है बावजूद इसके फिर भी मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
गुरिल्ला संगठन के प्रदेश अध्यक्ष यदुवीर सिंह राणा ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के राज्य आगमन पर 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री से बेरोजगार सैन्य प्रशिक्षित गुरिल्ला संगठन प्रतिनिधि शिष्टमंडल मुलाकात करेगा। इस संबंध में उनकी शासन से वार्ता जारी है
। इस दौरान वह विगत दो दशक से जारी रोजगार, मृतक आश्रित पेंशन और आयुसीमा पार कर चुके गुरिल्ला को सम्मानजनक पेंशन की मांग को दोहराएंगे। इसके लिए सोशलमीडिया के माध्यम से आगामी रणनीति पर विचार मंथन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गुरिल्ला एसएसबी का सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त है जिसकी सेवा का लाभ देश सेवा के लिए लिया जा सकता है।
बेरोजगार गुरिल्ला कहते हैं उत्तराखंड के गुरिल्लों ने अपने युवावस्था का स्वर्णिम काल, राष्ट्रहित में सेना के साथ प्रशिक्षण ले कर कंधे से कंधा मिलाकर अपने देश की रक्षा के लिए सहयोग किया, और कई वर्षों तक सेना के साथ कार्यरत रहे। वर्तमान स्थिति में कई गुरिल्ला साथी वृद्धावस्था में प्रवेश कर चुके हैं और अपने जीवन यापन के लिए संघर्षरत है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र जैसे असम अरुणाचल आदि में वहां की सरकार की ओर से वहां के गोरिल्लाओं को नौकरी और पेंशन की आर्थिक मदद प्रदान की जा रही है किंतु उत्तराखंड में न्यायालय की ओर से गुरिल्ला के हित में फैसला आने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई भी प्रयास नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण आज उत्तराखंड के गुरिल्ला की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है। काफी लंबे अर्से से गुरिल्ला अपनी आवाज कई बार केंद्र, राज्य सरकार और अदालत तक पहुंचा चुके हैं। बावजूद इसके वह अभी तक खाली हाथ बैठे हैं।
गुरिल्ला संगठन के चंपावत जिलाध्यक्ष ललित मोहन बगौली ने बताया कि गुरिल्ला स्वयं सेवक अपनी मांगों को लेकर पिछले 20 वर्ष से लगातार आंदोलन कर रहा है। राज्य के लगभग 15 हजार गुरिल्ला में से अधिकांश नौकरी की आयु सीमा पार करते जा रहे हैं। हमारी सरकार से गुरिल्लों को नौकरी, आयु सीमा पार कर चुके गुरिल्लों को सम्मान जनक पेंशन और मृतक आश्रितों को नौकरी की मांग प्रमुख है। उन्होंने बताया कि बावजूद इसके अब भी प्रशिक्षितों की मांग पूरी नहीं होने पर वह आंदोलन को और धार देते हुए राज्य के सभी जिलों के मुख्यालयों सहित देहरादून में धरने पर बैठ जाएंगे। इस संबंध में गुरिल्ला आगामी रणनीति तय कर रहे हैं।


