जंग थमने के बाद भी होर्मुज स्ट्रेट में सन्नाटा 24 घंटे में सिर्फ 11 जहाज गुजरे

अंतरराष्ट्रीय डेस्क उत्तरा न्यूज :अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिनों तक चली भीषण जंग के बाद दो हफ्तों के युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमति जरूर…

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क उत्तरा न्यूज :
अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिनों तक चली भीषण जंग के बाद दो हफ्तों के युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमति जरूर बन गई है लेकिन दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट में अभी भी सन्नाटा पसरा हुआ है। सीजफायर लागू होने के बावजूद ईरान ने इस व्यापारिक रास्ते को पूरी तरह से नहीं खोला है।

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लाइव ट्रैकर के डरावने आंकड़े
समुद्री जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले होर्मुज स्ट्रेट मॉनिटर वेबसाइट के ताजा लाइव ट्रैकर ने चिंता और बढ़ा दी है। ट्रैकर के मुताबिक पिछले 24 घंटों में होर्मुज स्ट्रेट से मात्र 11 जहाज ही गुजर सके हैं। शांति के समय इस रास्ते से रोजाना औसतन 60 जहाज गुजरते हैं। इसका सीधा मतलब है कि युद्धविराम की घोषणा के बाद भी व्यापारिक कंपनियों और जहाजों के अंदर अभी भी भारी खौफ बना हुआ है और यातायात अपने सामान्य स्तर के 20 प्रतिशत से भी नीचे आ गया है।


ईरान की चयनात्मक कूटनीति
ट्रैकर से एक बड़ा कूटनीतिक खुलासा यह भी हुआ है कि ईरान ने इस रास्ते पर चयनात्मक कूटनीति (सेलेक्टिव पासिंग) अपना रखी है। ईरान भारत चीन रूस इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे रहा है जबकि अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों को इस रास्ते से गुजरने से पूरी तरह से ब्लॉक किया हुआ है।


14 दिन लंबा रास्ता और तेल सप्लाई पर संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 21 फीसदी कच्चा तेल और 25 फीसदी प्राकृतिक गैस (एलएनजी) ट्रांसपोर्ट होता है। क्षेत्र में मंडराते सैन्य खतरे और बीमा कंपनियों द्वारा युद्ध बीमा वापस लिए जाने के कारण कई जहाज अब सुरक्षित लेकिन लंबे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। कई जहाजों को अब केप ऑफ गुड होप के रास्ते से भेजा जा रहा है जिससे सफर में 14 दिन का अतिरिक्त समय लग रहा है और परिवहन लागत भी कई गुना बढ़ गई है। जहाजों की संख्या में इस भारी कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई अब भी बुरी तरह से प्रभावित है।


भरोसा लौटने में लगेगा समय
समुद्री सुरक्षा और व्यापार के विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ सीजफायर का ऐलान कर देना ही काफी नहीं है। इतने लंबे संघर्ष के बाद जहाजों की आवाजाही धीरे धीरे ही रफ्तार पकड़ेगी। व्यापारिक कंपनियों और जहाजों के क्रू मेंबर्स के बीच असली भरोसा तभी बनेगा जब समुद्र में उन्हें पूरी तरह से सुरक्षित सफर की गारंटी मिलेगी।


कुल मिलाकर युद्ध के बादल तो फिलहाल छंट गए हैं लेकिन होर्मुज स्ट्रेट के पूरी तरह से खुलने और वैश्विक तेल सप्लाई के ट्रैक पर लौटने में अभी और समय लग सकता है। जब तक जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य नहीं होती तब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता ऊर्जा संकट टला नहीं है।

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