ट्रंप ने अपशब्दों के साथ ईरान को दी चेतावनी तो ईरान के दूतावास का पलटवार -अमेरिका पहले ही पाषाण युग में पहुंच गया

अंतरराष्ट्रीय (उत्तरा न्यूज डेस्क): ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपशब्दों का इस्तेमाल किए जाने के बाद दुनिया भर…

donald trump

अंतरराष्ट्रीय (उत्तरा न्यूज डेस्क): ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपशब्दों का इस्तेमाल किए जाने के बाद दुनिया भर में उनकी कड़ी आलोचना हो रही है।

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Trump warned Iran with abusive words

ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान के लिए अपशब्दों का प्रयोग करते हुए चेतावनी दी थी कि या तो वह तुरंत होर्मुज स्ट्रेट खोले या फिर इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।

ट्रंप की इस अभद्र भाषा पर कड़ा पलटवार करते हुए थाईलैंड स्थित ईरानी दूतावास ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जिस तरह किशोरों की तरह गालियां देते हैं, उसे देखकर लगता है कि अमेरिका उम्मीद से कहीं पहले ही पाषाण युग में पहुंच गया है। वहीं पाकिस्तान में स्थित ईरान के दूतावास ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को उनके असंतुलित व्यवहार और उच्च स्तरीय पदों को संभालने में अक्षमता के कारण महाभियोग चलाकर पद से हटा देना चाहिए।

अमेरिका के अंदर भी ट्रंप के इस बयान पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। न्यूयॉर्क से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद चक शुमर ने ईस्टर के मौके पर ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि जब लोग अपने परिवार के साथ जश्न मना रहे हैं, तब अमेरिका के राष्ट्रपति सोशल मीडिया पर एक बेकाबू पागल की तरह बड़बड़ा रहे हैं। उनका देश इससे कहीं बेहतर का हकदार है। पूर्व कांग्रेस सदस्य मार्जोरी टेलर ने भी ट्रंप को घेरते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट इसलिए बंद है क्योंकि अमेरिका और इसराइल ने बिना उकसावे के ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है। हालांकि सिनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप का बचाव करते हुए कहा कि राष्ट्रपति होर्मुज स्ट्रेट को बहाल करने और ईरान को दिए अल्टीमेटम को लेकर बेहद गंभीर हैं।

इस विवाद पर भारत से भी प्रतिक्रिया आई है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज झा ने अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए एक्स पर लिखा कि अमेरिकियों ने अपने साथ यह क्या कर लिया है। उन्होंने कहा कि जब राजनीति महज़ एक तमाशा बन जाती है, तो वह ताकत नहीं बल्कि जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना दिखाती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एक लोकतंत्र अपनी सामूहिक समझ से किसे अपनाता है और किसे सामान्य मानता है।

गौरतलब है कि ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले के बाद से राष्ट्रपति ट्रंप कई बार अपने बयान बदल चुके हैं। कभी वह ईरान को पांच दिनों की मोहलत देते हैं तो कभी इसे बढ़ाकर 10 दिन कर देते हैं। युद्ध जीतने के दावों से लेकर होर्मुज स्ट्रेट और ईरान की परमाणु क्षमता के मुद्दे तक उनके बयानों में कई बार विरोधाभास दिखा है। साथ ही वह इस युद्ध को लेकर अपने नेटो सहयोगियों पर भी कई बार नाराजगी जता चुके हैं।

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