अंतर्राष्ट्रीय (उत्तरा न्यूज़ डेस्क): अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। गुरुवार को अमेरिका ने ईरान के करज शहर के पास स्थित देश के सबसे ऊंचे पुल को हवाई हमले में तबाह कर दिया। इस हमले के ठीक एक दिन बाद, ईरान ने मिडिल ईस्ट के 8 बड़े पुलों की एक ‘हिट लिस्ट’ जारी कर दी है, जिन्हें वह कभी भी अपना निशाना बना सकता है। ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका को साफ चेतावनी दी है कि ईरानी अवाम किसी भी कीमत पर सरेंडर नहीं करेगी।
अमेरिका ने किया था ईरान के सबसे ऊंचे B1 ब्रिज पर हमला
गुरुवार को अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के करज में स्थित B1 पुल आंशिक रूप से तबाह हो गया। 136 मीटर ऊंचे और लगभग 1000 मीटर लंबे इस पुल को मध्य पूर्व का सबसे ऊंचा पुल माना जाता है। इस पुल पर निर्माण कार्य चल रहा था और इसका मकसद तेहरान को पश्चिमी शहर करज से जोड़ना था। यह हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के ठीक बाद हुआ, जिसमें उन्होंने ईरान को ‘पाषाण युग’ में भेजने की धमकी दी थी।
ट्रंप ने वीडियो शेयर कर दी थी चेतावनी
हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पुल में लगी आग और धुएं का वीडियो शेयर किया। उन्होंने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए लिखा कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, ईरान कोई समझौता कर ले।
ईरान के निशाने पर मिडिल ईस्ट के ये 8 बड़े पुल
ईरानी मीडिया और अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, खाड़ी देशों और जॉर्डन के कई प्रमुख पुल अब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के संभावित निशाने पर हैं। ईरान ने जिन 8 अहम पुलों की सूची जारी की है, वे इस प्रकार हैं:
- शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबाह सी ब्रिज (कुवैत)
- शेख जाएद ब्रिज (संयुक्त अरब अमीरात)
- अल मक्ता ब्रिज (संयुक्त अरब अमीरात)
- शेख खलीफा ब्रिज (संयुक्त अरब अमीरात)
- किंग फहद कॉजवे (सऊदी अरब को बहरीन से जोड़ने वाला पुल)
- किंग हुसैन ब्रिज (जॉर्डन)
- दामिया ब्रिज (जॉर्डन)
- अब्दौलन ब्रिज (जॉर्डन)
ईरानी कभी सरेंडर नहीं करेंगे
डोनाल्ड ट्रंप की धमकी का कड़ा जवाब देते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि नागरिक ढांचों और अधूरे पुलों पर हमला करने से ईरानी लोग आत्मसमर्पण करने को मजबूर नहीं होंगे। यह केवल एक हताश दुश्मन की स्थिति और उसके नैतिक पतन को दर्शाता है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि हर पुल और इमारत को पहले से भी ज्यादा मजबूत बनाया जाएगा, लेकिन अमेरिका की साख को जो भारी नुकसान पहुंचा है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो पाएगी।

