ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमुख बंद होने के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल मची हुई है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार कई देश अब तेल की सप्लाई के वैकल्पिक रास्तों पर काम करने पर विचार कर रहे हैं। इस सिलसिले में प्रस्तावित इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकनॉमिक कॉरिडोर एक संभावित विकल्प बन सकता है, जिससे भारत मध्य एशिया के रास्ते सीधे यूरोप से जुड़ सकेगा।
खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था इस संकट से प्रभावित हुई है। लंबे समय से होर्मुज मार्ग तेल के आयात-निर्यात का प्रमुख रास्ता रहा है, लेकिन अब वैकल्पिक मार्गों की जरूरत महसूस की जा रही है। सऊदी अरब को पहले से बिछाई लाल सागर पाइपलाइन से फायदा हुआ और उसकी तेल सप्लाई प्रभावित नहीं हुई।
इजरायल के हाइफा पोर्ट से अरब सागर और भूमध्य सागर को जोड़ने वाले वैकल्पिक रूट पर भी चर्चा हो रही है। इस मार्ग में पाइपलाइन के साथ सड़क और रेलवे नेटवर्क की भी जरूरत होगी। लेबनान की कंस्ट्रक्शन कंपनी कैट ग्रुप के सीईओ क्रिस्टोफर बुश के अनुसार इस तरह के प्रोजेक्ट में अब निवेश और रुचि बढ़ रही है।
भारत I2U2 समूह के हिस्से के रूप में इस कॉरिडोर में अहम भूमिका निभा सकता है। इसमें यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन और इजरायल भी शामिल हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री ने वैकल्पिक मार्ग का समर्थन किया है और इसे भविष्य में तेल सप्लाई के लिए संभावित विकल्प माना जा रहा है।

