ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का अमेरिकी जनता के नाम भावुक पत्र: हमारा टकराव सरकारों से है, लोगों से नहीं

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Iranian President Masoud Pejeshkian's emotional letter to the American people: Our conflict is with governments, not with the people

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सीधे अमेरिकी नागरिकों को संबोधित करते हुए एक ऐतिहासिक और विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने ईरान के प्रति पश्चिमी विमर्श (Narratives) को चुनौती दी है और अमेरिका के साथ संबंधों के बिगड़ने के ऐतिहासिक कारणों पर प्रकाश डाला है।

“ईरान ने कभी युद्ध शुरू नहीं किया”

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अपने पत्र की शुरुआत ईरान की प्राचीन सभ्यता का हवाला देते हुए की। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक इतिहास में ईरान ने कभी भी किसी देश पर हमला या विस्तारवाद की नीति नहीं अपनाई है। उन्होंने कहा, “सैन्य श्रेष्ठता के बावजूद ईरान ने कभी युद्ध की पहल नहीं की, लेकिन हमला होने पर अपनी रक्षा पूरी ताकत से की है।”

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अमेरिकी जनता और सरकार के बीच अंतर

पत्र का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करने पर केंद्रित है। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके मन में अमेरिकी या यूरोपीय जनता के प्रति कोई द्वेष नहीं है। उन्होंने एक “गहराई से जड़ जमाए हुए सिद्धांत” का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरानी लोग हमेशा ‘सरकारों’ और ‘वहां की जनता’ के बीच स्पष्ट अंतर रखते हैं।

ऐतिहासिक अविश्वास की जड़ें: 1953 का तख्तापलट

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दोनों देशों के बीच संबंधों में कड़वाहट के लिए ऐतिहासिक घटनाओं को जिम्मेदार ठहराया:

  • 1953 का तख्तापलट: उन्होंने इसे एक “अवैध अमेरिकी हस्तक्षेप” बताया जिसने ईरान की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट कर दिया।
  • सद्दाम हुसैन का समर्थन: 1980 के दशक के युद्ध में अमेरिका द्वारा इराक का साथ देने पर भी सवाल उठाए गए।
  • परमाणु समझौता: उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने अपने वादे पूरे किए, लेकिन अमेरिका ने एकतरफा तरीके से समझौते से हटकर टकराव का रास्ता चुना।

“इजरायल के हाथों का खिलौना न बने अमेरिका”

पत्र में इजरायल की भूमिका पर कड़े प्रहार किए गए हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिकी जनता से सवाल किया कि क्या अमेरिका, इजरायल के ‘प्रॉक्सी’ के रूप में काम कर रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल, ईरान को एक “खतरे” के रूप में पेश करके फिलिस्तीन के मुद्दे से दुनिया का ध्यान भटकाना चाहता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इजरायल चाहता है कि अमेरिका “अपने आखिरी सैनिक और आखिरी टैक्स डॉलर” तक ईरान से लड़े।

विकास और प्रगति का दावा

प्रतिबंधों के बावजूद ईरान की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि ईरान की साक्षरता दर तीन गुना हो गई है और तकनीक व स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश ने 30% से अधिक की वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से आग्रह किया कि वे ईरान को उन सफल ईरानी प्रवासियों की नजर से देखें जो आज पश्चिम के बड़े विश्वविद्यालयों और कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शांति का आह्वान या चेतावनी?

पत्र के अंत में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दुनिया को एक ‘चौराहे’ पर खड़ा बताया। उन्होंने कहा कि टकराव का रास्ता महंगा और व्यर्थ है। उन्होंने संदेश दिया कि ईरान एक लचीला और गौरवशाली राष्ट्र है जिसने इतिहास में कई हमलावरों को मात दी है और वह झुकने वाला नहीं है।

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