अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया राष्ट्र के नाम संबोधन- ईरान की खैर नहीं, 2 हफ्तों में होगा बड़ा हमला

ईरान के साथ जारी भीषण जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन (Presidential Address) देते हुए दुनिया को चौंका दिया…

donald trump

ईरान के साथ जारी भीषण जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन (Presidential Address) देते हुए दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अब ईरान के साथ किसी भी तरह की ‘डील’ की गुंजाइश नहीं है और अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर “अब तक का सबसे जोरदार हमला” करने की तैयारी में है।

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इस संबोधन के बाद वैश्विक तेल बाजार और कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

होर्मुज़ स्ट्रेट पर ट्रंप का दोटूक जवाब

दुनिया भर की नजरें इस वक्त होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर टिकी हैं, जहाँ से दुनिया का बड़ा तेल व्यापार होता है। ट्रंप ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका को अब होर्मुज़ के रास्ते आने वाले तेल की जरूरत नहीं है। हम ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर हैं। जिन देशों को यहाँ से तेल चाहिए, वे खुद इस रास्ते की हिफाजत करें।

संबोधन की 5 बड़ी बातें:

  1. परमाणु संयंत्रों पर निशाना: ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि ईरान ने होर्मुज़ मार्ग को बाधित किया, तो अमेरिका उसके परमाणु ठिकानों को तबाह कर देगा।
  2. सैन्य बढ़त: ट्रंप के अनुसार, पिछले चार हफ्तों में अमेरिकी सेना ने निर्णायक जीत हासिल की है और ईरान की नौसेना को भारी नुकसान पहुँचाया है।
  3. वेनेजुएला मॉडल: राष्ट्रपति ने वेनेजुएला में हुए सफल अमेरिकी ऑपरेशन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के तेल भंडारों पर अब अमेरिका का प्रभाव है।
  4. तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला: आने वाले हफ्तों में ईरान के तेल कुओं और रिफाइनरियों को निशाना बनाया जा सकता है, जिससे उसकी आर्थिक कमर टूट जाए।
  5. कूटनीति के द्वार: हालांकि हमले की धमकी दी गई है, लेकिन ट्रंप ने यह भी कहा कि पर्दे के पीछे बातचीत के रास्ते अभी भी खुले हैं।

भारत और दुनिया पर क्या होगा असर?

ट्रंप के इस सख्त रुख के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 105 डॉलर के पार जा सकती हैं। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी तेल जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है।

विशेषज्ञों की राय:

जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह संबोधन ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है, ताकि उसे बिना किसी बड़ी जंग के बातचीत की मेज पर लाया जा सके।

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