पिछले साल आठ दिसंबर को ईरानी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से एमटी वैलेंट रोर जहाज़ को कब्ज़े में लिया था। इस जहाज़ के 18 क्रू मेंबर्स में 16 भारतीय थे। इनमें से आठ भारतीय पहले ही 10 फ़रवरी को रिहा होकर भारत लौट चुके थे, लेकिन बाकी आठ सदस्य ईरान में जारी तनाव और युद्ध की वजह से लंबे समय तक घर नहीं आ पाए।
कप्तान विजय और अन्य सात चालक दल सदस्य आखिरकार 29 मार्च को आर्मीनिया के रास्ते भारत पहुंचे। उन्होंने बीबीसी हिंदी से बातचीत में बताया कि गिरफ्तारी के दौरान उनके पैसे, कपड़े, मोबाइल, लैपटॉप, पासपोर्ट और शैक्षणिक दस्तावेज़ ज़ब्त कर लिए गए थे।
सेकेंड इंजीनियर राजशेखर डूंगा ने कहा कि उन्हें अक्सर नमक के साथ चावल खाना पड़ता था और पीने के लिए इंडस्ट्रियल वाटर उबालना पड़ता था। इस बीच उनके परिजनों ने जनवरी में दिल्ली हाईकोर्ट का रुख़ किया, जिससे भारतीय दूतावास ने काउंसलर एक्सेस उपलब्ध कराया।
रिहाई का आदेश 27 फ़रवरी को मिला, लेकिन उस समय इसराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले शुरू हो गए। सुरक्षा कारणों से उन्हें तुरंत भारत नहीं भेजा जा सका। 15 मार्च को आर्मीनिया बॉर्डर खुलने की सूचना मिलने के बाद चालक दल ने वीज़ा प्रक्रिया पूरी की और 29 मार्च की सुबह मुंबई पहुंचे।
भारत लौटने के बाद चालक दल ने राहत महसूस की। मसूद आलम की ईद के बाद शादी की तैयारियां अब फिर से शुरू हो गई हैं और परिवार में खुशियों का माहौल लौट आया है।

