गैस सिलेंडर की कमी और अनिश्चित आपूर्ति के बीच साइबर अपराधियों की सक्रियता तेजी से बढ़ गई है। उपभोक्ता जहां गैस मिलने को लेकर परेशान हैं, वहीं ठग इस स्थिति को मौका बनाकर लोगों के बैंक खातों पर हमला बोल रहे हैं। मुंबई में सामने आए मामलों ने यह साफ कर दिया है कि गिरोह कितनी तेजी और चतुराई से काम कर रहा है। महानगर गैस का नाम इस्तेमाल कर बीते कुछ हफ्तों में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी हो चुकी है और शहर के कई लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं।
ठग खुद को महानगर गैस लिमिटेड से जुड़ा अधिकारी बताकर कॉल और मैसेज करते हैं। गैस बिल बकाया दिखाकर उपभोक्ता को डराया जाता है और कनेक्शन बंद करने की चेतावनी देकर उन्हें भ्रमित किया जाता है। इसके बाद उन्हें भरोसे में लेकर ‘बिल अपडेट’ के नाम पर एक एपीके फाइल भेजी जाती है। जैसे ही व्यक्ति इस फाइल को इंस्टॉल करता है, मोबाइल में मौजूद मालवेयर सक्रिय हो जाता है और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सीधे अपराधियों के पास पहुंच जाती है। ओटीपी, पासवर्ड और फोन का एक्सेस तक ठगों के नियंत्रण में चला जाता है।
मुलुंड पश्चिम के 20 वर्षीय व्यापारी मितुल दोषी इसी जाल में फंस गए। कनेक्शन बंद होने का संदेश मिलने पर उन्होंने 1150 रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके तुरंत बाद भेजी गई एपीके फाइल डाउनलोड करते ही उनके खाते से 11.82 लाख रुपये निकाल लिए गए। इसी तरह मालाड पूर्व में रहने वाली 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला के खाते से केवल 20 मिनट में 8.59 लाख रुपये गायब हो गए, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।
साइबर पुलिस का कहना है कि यह गिरोह पूरी तैयारी के साथ काम कर रहा है और उनका तरीका बेहद योजनाबद्ध है। पहले डर पैदा किया जाता है, फिर विश्वास दिलाया जाता है और अंत में तकनीकी जाल में फंसाकर बैंक खाते खाली कर दिए जाते हैं।
अधिकारियों ने साफ किया है कि कोई भी गैस कंपनी एपीके फाइल भेजकर भुगतान या बिल अपडेट नहीं करवाती। लोगों से अपील की गई है कि केवल आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित ऐप का ही उपयोग करें और किसी भी अनजान लिंक या फाइल से दूरी बनाए रखें। यदि कोई व्यक्ति ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिना देर किए 1930 साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करना जरूरी है ताकि खाते को सुरक्षित किया जा सके।

