कमर्शियल गैस सिलिंडरों की कमी ने पूरे जिले में शादी समारोहों की तैयारियों को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। मार्च तक चल रहे मौजूदा विवाह दौर में तो लोग किसी तरह प्रबंधन कर रहे हैं, लेकिन 15 अप्रैल से मई तक शुरू होने वाला अगला सीजन कैटरिंग और होटल कारोबार के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। इस बार शुभ लगन कम होने के कारण एक ही दिन कई कई विवाह आयोजित होने हैं, जिससे गैस की किल्लत का प्रभाव और बढ़ जाता है। आयोजन करने वाले परिवार और कैटरिंग संचालक पहले से ही अनिश्चितता में फंसे दिखाई दे रहे हैं।
हल्द्वानी में यह संकट सबसे अधिक गहरा महसूस किया जा रहा है। शहर के कैटरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष हर्षवर्धन पांडे का कहना है कि करीब 80 बैंक्वेट हॉल और बड़ी संख्या में घरों में होने वाले आयोजन कमर्शियल गैस पर ही चलते हैं। लकड़ी से भोजन बनाना संभव है, लेकिन बुफे में व्यंजन गर्म रखने के लिए इंडक्शन चूल्हे अनिवार्य हो जाते हैं, जिससे बिजली का खर्च तेजी से बढ़ता है। इसी कारण कैटरिंग संचालक प्रति प्लेट 100 से 150 रुपये तक बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। बढ़ती लागत का असर परिवारों के बजट पर पड़ेगा और मेन्यू में कटौती करनी पड़ सकती है।
नैनीताल में स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो चुकी है। यहां कैटरिंग करने वाले लगभग सभी लोगों ने नई बुकिंग लेना बंद कर दिया है। कई संचालकों ने शादी करने वाले परिवारों से साफ कहा है कि अगर वे खुद सिलिंडर की व्यवस्था नहीं कर पाते, तो वे कार्यक्रम पूरा नहीं करा पाएंगे।
मल्लीताल के कैटरिंग संचालकों को बुकिंग रद्द करनी पड़ रही है और सिलिंडर न मिलने की वजह से शहर के चार रेस्टोरेंट भी बंद करने पड़े हैं। इससे स्थानीय व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है और शहर में चिंता का माहौल है।
रामनगर, जो डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए काफी प्रसिद्ध है, वहां रिजॉर्ट और होटल अब दोबारा पुराने दौर की तरह लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेने लगे हैं। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीमान सिंह बताते हैं कि बड़े-बड़े आयोजनों में अब उबालने वाले व्यंजन, तंदूरी डिश और फ्राई आइटम लकड़ी पर ही तैयार किए जा रहे हैं। लकड़ी पर खाना पकाने में समय और मेहनत दोनों अधिक लगते हैं, इसलिए पर्यटकों के लिए भी कई व्यंजन मेन्यू से हटाने पड़े हैं। कैटरिंग कारोबारियों का कहना है कि तंदूर बढ़ाने पड़े हैं, लेकिन अप्रैल के सीजन में होने वाली लगातार शादियां हालात को और मुश्किल कर देंगी।
गैस सप्लाई रुकने के बाद जिलेभर में इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक कई गुना बढ़ गई है। हल्द्वानी के बड़े इलेक्ट्रॉनिक स्टोरों में जहां पहले रोजाना केवल दो या तीन इंडक्शन बिकते थे, वहीं अब बिक्री 15 तक पहुंच गई है। कई दुकानों में स्टॉक खत्म हो चुका है और नए माल की तारीख को लेकर भी कोई स्पष्टता नहीं है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बड़े ब्रांडों के मॉडल आउट ऑफ स्टॉक दिख रहे हैं। रामनगर के व्यापारियों का कहना है कि दो किलोवॉट के इंडक्शन की कीमत भले ही दो हजार रुपये से शुरू होती है, लेकिन खरीदार इतने बढ़ गए हैं कि उपलब्धता पूरा करना मुश्किल हो गया है।
जिले में अधिकांश विवाह मार्च तक संपन्न हो चुके हैं, लेकिन असली दबाव अप्रैल और मई में पड़ना है।
इन महीनों में प्रतिदिन करीब 150 शादियां आयोजित होती हैं, जिनमें कैटरिंग से लेकर होटल और बैंक्वेट तक हर व्यवस्था कमर्शियल गैस पर निर्भर रहती है। यदि आने वाले हफ्तों में सिलिंडरों की आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो न केवल कारोबारियों की परेशानी बढ़ेगी बल्कि शादी करने वाले परिवारों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ और सीमित विकल्पों का दबाव बढ़ जाएगा। आने वाला विवाह सीजन जिले के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
