मार्च की शुरुआत हो गई है और अभी से ही काफी गर्मी होने लगी है दिन में तेज धूप हो रही है जिसकी वजह से लोग अभी से गर्मी का एहसास कर रहे हैं। धीरे-धीरे स्वेटर और जैकेट हटाकर लोग हल्के कपड़ों की तरफ लौट रहे हैं। दफ्तरों में भी एसी अब चलने लगा है और आने वाले दिनों में घरों में भी इसका इस्तेमाल बढ़ जाएगा।
ऐसे में आप भी गर्मी में नया एसी खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तब यह सवाल उठता है कि इनवर्टर एसी लिया जाए या नॉन इनवर्टर एसी। दोनों के काम करने का तरीका बिजली की खपत और कीमत में क्या अलग होता है। आईए जानते हैं खरीदारी से पहले इनका फर्क
इनवर्टर और नॉन इनवर्टर एसी के काम करने का तरीका एक दूसरे से अलग होता है। नॉन इनवर्टर एसी में कंप्रेसर एक स्पीड तय करता है जब कमरे का तापमान सेट किए गए लेवल तक पहुंच जाता है तो कंप्रेसर बंद हो जाता है और तापमान बढ़ने पर फिर से चालू होता है।
वहीं इन्वर्टर एसी में कंप्रेसर लगातार चलता रहता है, लेकिन जरूरत के हिसाब से उसकी स्पीड कम या ज्यादा होती रहती है। इसी वजह से इन्वर्टर एसी ज्यादा स्थिर और आरामदायक कूलिंग देता है।
बिजली की खपत के मामले में इनवर्टर एसी को ज्यादा बेहतरीन माना जाता है। इसका कारण यह है कि इसमें कंप्रेसर बार-बार बंद हो जाता है और चालू नहीं होता बल्कि धीरे-धीरे अपनी स्पीड को एडजस्ट करता है। इससे बिजली की खपत कम होती है।
वहीं दूसरी तरफ नॉन इनवर्टर एसी में कंप्रेसर बार-बार ऑन और ऑफ होता है जिससे बिजली की खपत ज्यादा होती है और लंबे समय में बिजली का बिल ज्यादा हो जाता है।
कूलिंग की बात करें तो दोनों एसी कमरे को ठंडा करने का काम करते हैं, लेकिन इन्वर्टर एसी आमतौर पर कमरे को जल्दी ठंडा कर देता है। इसके साथ ही यह कमरे के तापमान को स्थिर बनाए रखने में भी मदद करता है। नॉन इन्वर्टर एसी भी अच्छी कूलिंग देता है, लेकिन कई बार इसमें तापमान ऊपर-नीचे होने की वजह से ठंडक उतनी स्थिर महसूस नहीं होती।
इन्वर्टर और नॉन इन्वर्टर एसी की कीमतों में भी अंतर देखने को मिलता है। आमतौर पर नॉन इन्वर्टर एसी की शुरुआती कीमत करीब 20 से 25 हजार रुपये के आसपास होती है। वहीं इन्वर्टर एसी की कीमत आमतौर पर 30 हजार रुपये से शुरू होती है और फीचर्स के हिसाब से आगे बढ़ती जाती है।
हालांकि शुरुआती कीमत ज्यादा होने के बावजूद इन्वर्टर एसी लंबे समय में बिजली की बचत की वजह से कई लोगों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
