Holi in Vrindavan and Mathura: सोचिए कि आप ऐसी जगह गए हैं जहां हवा में गुलाल हो और मंदिरों में भजन भी सुनाई दे रहे हैं। यह दृश्य सोचकर ही मन खुश हो जाता है। ऐसा ही अनुभव मिलता है ब्रज की होली में।
देश के कई हिस्सों में होली दो दिन मनाई जाती है लेकिन उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में या उत्सव करीब 40 दिन तक चलता है। यहां होली सिर्फ रंगों का त्यौहार नहीं बल्कि आस्था परंपरा और आनंद का संगम भी है। मथुरा की पुरानी गलियों से लेकर नंदगांव और बरसाना तक होली का रंग चलता है जिसमें कई नई रसम और रिवाज भी दिखाई देते हैं जो लोग शहरों से हटकर कुछ खास और यादगार अनुभव चाहते हैं उनके लिए यह होली किसी सपने से कम नहीं होती।
ब्रज की होली की शुरुआत बसंत पंचमी से हो जाती है और रंग पंचमी तक इसका उल्लास बना रहता है शुरुआत में हल्के गुलाल और भजन कीर्तन के साथ माहौल तैयार होता है और जैसे-जैसे दिन बढ़ते जाते हैं हर चौक चौराहे पर रंग छा जाता है।
ब्रज का हर स्थान अपनी अलग पहचान भी रखता है मथुरा में विश्राम घाट की आरती और मंदिरों में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम मन को मोह लेते हैं। बरसाना की लठमार होली विश्व भर में प्रसिद्ध है जहां महिलाएं लाठियां से खेलती हैं।
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होली का दृश्य बेहद अद्भुत होता है। इसके अलावा लड्डू होली और अन्य पारंपरिक आयोजन भी यहां होते हैं।
होली के दौरान यहां काफी भीड़ रहती है। इसके लिए आपको पहले से ही योजना बनानी होगी होटल गेस्ट हाउस या धर्मशाला की बुकिंग समय रहते करवा ले ताकि आखिरी समय ठहरने की कोई समस्या ना हो।
यहां ऐसे कपड़े पहने जो रंग लगने पर खराब हो जाए तो आपको दुख ना हो इसमें आप हल्के सूती और आरामदायक कपड़े पहन सकते हैं। यह सबसे बेहतर रहते हैं।
सफेद कुर्ता-पायजामा या साधारण पारंपरिक वस्त्र यहां के माहौल में अच्छे लगते हैं और फोटो के लिए भी आकर्षक रहते हैं।
भीड़ में अपने मोबाइल, पर्स और अन्य कीमती सामान को सुरक्षित रखें।
फोन को पानी और रंग से बचाने के लिए वॉटरप्रूफ कवर का उपयोग करें।
ज्यादा नकदी साथ न रखें, जरूरी सामान ही लेकर निकलें।
स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान करें, क्योंकि ब्रज की होली आस्था से जुड़ा उत्सव है।
बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें, क्योंकि भीड़ में असुविधा हो सकती है।
