दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की SWAT यूनिट में तैनात 27 वर्षीय महिला कांस्टेबल काजल की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। आरोप है कि उसके पति अंकुर चौधरी (28) ने घरेलू विवाद के बीच उस पर डंबल से हमला किया और सिर को जोर से दरवाजे के फ्रेम पर दे मारा। चोटें इतनी गंभीर थीं कि डॉक्टर भी कुछ नहीं कर सके।
हमले के तुरंत बाद काजल को द्वारका स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। हालत नाजुक बनी रहने के कारण 25 जनवरी को गाजियाबाद शिफ्ट किया गया, लेकिन 27 जनवरी की सुबह करीब 6 बजे उसने दुनिया छोड़ दी।
मामले में शुरुआत में हत्या के प्रयास का केस दर्ज हुआ था, लेकिन काजल की मौत के बाद इसे हत्या की धारा में बदल दिया गया।
आरोपी अंकुर को पुलिस ने गिरफ्तार कर अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। काजल के भाई निखिल जो खुद भी दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल हैं ने घटना से पहले की आखिरी फोन कॉल का ऐसा विवरण बताया है, जिसे सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए।
हरियाणा के गनौर की रहने वाली काजल 2022 में दिल्ली पुलिस में भर्ती हुई थीं। कमांडो ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह स्पेशल सेल की SWAT टीम का हिस्सा बनीं, जो दिल्ली पुलिस की उन खास इकाइयों में से एक है जो आतंकवाद और अत्यधिक जोखिम वाले मिशनों में तैनात रहती हैं।
घटना वाली रात करीब 10 बजे अंकुर ने निखिल को फोन किया। बातचीत घरेलू तनाव और कथित दहेज की मांग पर शुरू हुई। अंकुर ने शिकायत की कि काजल झगड़ा कर रही है। कुछ देर बाद काजल ने फोन लिया और भाई को बात समझाने की कोशिश की, लेकिन अंकुर ने फोन छीन लिया। इसके बाद उसने धमकी देते हुए कहा कि बातचीत रिकॉर्ड कर लो, क्योंकि वह काजल का अंत कर देगा।
इसके बाद फोन पर काजल की चीखें सुनाई दीं। आरोप है कि अंकुर ने डंबल से हमला कर उसके सिर को दरवाजे पर दे मारा। थोड़ी देर में फोन कट गया। पांच मिनट बाद अंकुर ने दोबारा कॉल किया और ठंडे स्वर में कहा मैंने तेरी बहन को खत्म कर दिया। आकर ले जा
जब निखिल दिल्ली पहुंचा, तब तक काजल अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थीं। डॉक्टरों ने उनकी हालत को देखते हुए ब्रेन डेड घोषित कर दिया। दो दिनों की कोशिश के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
पहले 307 और बाद में 302 के तहत मामला दर्ज हुआ। परिवार का आरोप है कि अंकुर लंबे समय से दहेज के लिए दबाव डालता था और काजल के साथ मारपीट करता था। स्पेशल पुलिस कमिश्नर मधु तिवारी ने कहा है कि मामले की जांच बेहद गंभीरता से चल रही है और दोषी को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
पुलिस की पड़ताल और परिवार के आरोपों से दो वजहें साफ दिखाई देती हैं लगातार बढ़ते घरेलू तनाव और दहेज की मांग। काजल जैसी प्रशिक्षित कमांडो, जो मुश्किल हालात में भी डटी रहती थी, घर में ही असुरक्षित थी।
यह सिर्फ घरेलू हिंसा का मामला नहीं, बल्कि उस कड़वी सच्चाई का आईना है कि वर्दी पहनने वाली महिला भी घर की चारदीवारी में खतरे में पड़ सकती है। महिला पुलिसकर्मियों को भी घरेलू हिंसा से सुरक्षा और संवेदना की उतनी ही जरूरत है, जितनी किसी भी महिला को। दहेज के खिलाफ कानून तभी असरदार होंगे, जब समाज में भी जागरूकता और कड़ाई दोनों साथ चलें।
काजल की मौत एक ऐसी बहादुर महिला की कहानी बन गई, जो बाहर तो दुश्मनों से निडर होकर लड़ती थी, लेकिन अपने ही घर में वह खुद को बचा नहीं पाई।
