एक क्लिक से 200 सामान्य मरीज बन गए टीबी संक्रमित घोषित! रुद्रपुर में बड़ी लापरवाही, क्या है मामला?

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। सीएमओ कार्यालय की एक बड़ी…

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उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। सीएमओ कार्यालय की एक बड़ी लापरवाही सामने उजागर हुई है। यहां सरकारी पोर्टल पर डाटा एंट्री के दौरान हुई एक भूल ने 200 सामान्य लोगों को टीबी से संक्रमित कर दिया।

इस चूक से न केवल मरीज बल्कि उनके परिजनों में भी डर, तनाव और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
बताया जा रहा है सीएमओ कार्यालय में तैनात क्लर्क द्वारा टीबी नियंत्रण कार्यक्रम से जुड़े पोर्टल पर मरीजों का डाटा अपलोड किया जा रहा था।

इसी दौरान एक गलत क्लिक की वजह से करीब 200 मरीज जिन्हें कभी टीवी की शिकायत भी नहीं थी, सरकारी रिकॉर्ड में टीबी पॉजिटिव दर्ज हो गए। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में गलत एंट्री होने के बावजूद किसी स्तर पर समय रहते सत्यापन नहीं किया गया।


यह मामला उसे समय सामने आया जब शासन स्तर पर आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जिले में टीबी संक्रमित की संख्या अचानक बढ़ गई।
बताया जा रहा है की असामान्य वृद्धि को देखते हुए जब रिकॉर्ड की जांच कराई गई तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई जांच में पता चला कि टीबी पोर्टल पर लगभग साढे चार सौ मरीजों का डाटा अपलोड किया गया। इसी दौरान 200 सामान्य मरीजों को गलती से टीवी संक्रमित के रूप में दर्ज कर दिया गया।


जैसे ही यह जानकारी संबंधित मरीजों तक पहुंची, वे सकते में आ गए। टीबी जैसी संक्रामक बीमारी का नाम जुड़ते ही कई मरीजों ने सामाजिक दूरी बनानी शुरू कर दी। कुछ लोग बीमारी के डर और संकोच के कारण घर से बाहर निकलना बंद कर बैठे, तो कुछ ने कामकाज तक छोड़ दिया।


कई परिवारों में इस वजह से तनाव का माहौल बन गया। इस पूरे प्रकरण पर जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. हरेंद्र मलिक ने बताया कि सभी प्रभावित मरीजों की ट्रूनेट जांच कराने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह का संदेह पूरी तरह दूर किया जा सके।


इस मामले पर कम होने सफाई देते हुए कहा कि डाटा एंट्री के दौरान मानवीय भूल हो गई है जैसे मामले की जानकारी मिली तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी 200 मरीज के रिकॉर्ड की जांच कराए गए और दर्ज किए गए नाम को पोर्टल से संशोधित कराया। उन्होंने मरीजों से अपील की कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।


यह घटना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाह कार्यप्रणाली को उजागर करती है और भविष्य में ऐसी गंभीर चूकों से बचने के लिए सख्त निगरानी और सत्यापन व्यवस्था की जरूरत पर जोर देती है। यह मामला केवल एक तकनीकी गलती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर मरीजों की मानसिक और सामाजिक स्थिति पर पड़ा।

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