Handala एक ईरानी-समर्थित हैकर ग्रुप है जिसने अमेरिका के टॉप सुरक्षा अधिकारियों से लेकर कॉरपोरेट जगत तक में खौफ पैदा कर दिया है। लेकिन साइबर हमलों से परे, इस ग्रुप के नाम ‘हंडाला’ के पीछे एक बहुत गहरा और ऐतिहासिक दर्द छिपा है।अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा भू-राजनीतिक तनाव अब एक खतरनाक ‘साइबर युद्ध’ में बदल चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की नींद इन दिनों एक नाम ने उड़ा रखी है— ‘हंडाला’
पहले जानिए, Handala ने अमेरिका में क्या तबाही मचाई है?
हाल ही में हंडाला हैकर ग्रुप ने अमेरिका को दो बड़े झटके दिए हैं। FBI और DOJ में सेंधमारी: रॉयटर्स की 27 मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, Handala ने दावा किया है कि उसने अमेरिका की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी FBI के डायरेक्टर और न्याय विभाग (DOJ) के एक शीर्ष अधिकारी के ‘निजी ईमेल’ हैक कर लिए हैं। यह अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा में एक बहुत बड़ी सेंध है।
कॉरपोरेट जगत पर हमला: इससे ठीक पहले, 11 मार्च को Handala group ने अमेरिका की दिग्गज मेडिकल टेक कंपनी ‘स्टाइकर’ (Stryker) के सिस्टम को हैक किया था। इस साइबर हमले के बाद शेयर बाजार में स्टाइकर के शेयरों में 2.5% की भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जिसने अमेरिकी निवेशकों को हिलाकर रख दिया।
हैक से लेकर शेयर बाजार तक दहशत: जानें ट्रंप के लिए मुसीबत बने हैकर ग्रुप ‘हंडाला’ (Handala) की पूरी कहानी
आखिर क्या है Handala ? एक कार्टून जो बन गया प्रतिरोध का प्रतीक
अमेरिका को दहलाने वाले इस हैकर ग्रुप का नाम किसी खतरनाक हथियार पर नहीं, बल्कि एक ‘कार्टून कैरेक्टर’ पर रखा गया है।
Handala दरअसल 10 साल के एक फिलिस्तीनी शरणार्थी बच्चे का स्केच है। इसे 1969 में मशहूर फिलिस्तीनी कार्टूनिस्ट नाजी अल-अली (Naji al-Ali) ने बनाया था। यह पहली बार कुवैत के एक अखबार में छपा था। आज यह कार्टून पूरे मध्य पूर्व में प्रतिरोध, संघर्ष और मातृभूमि छिन जाने के दर्द का सबसे बड़ा प्रतीक है।
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फटे कपड़े, नंगे पैर और पीछे बंधे हाथ… क्या है इस तस्वीर का मतलब?
हंडाला की तस्वीर कोई साधारण चित्र नहीं है; इसका हर एक पहलू एक कड़ा संदेश देता है:
उम्र हमेशा 10 साल: कार्टूनिस्ट नाजी अल-अली को 10 साल की उम्र में अपना फिलिस्तीनी घर छोड़कर शरणार्थी बनना पड़ा था। इसलिए हंडाला की उम्र भी 10 साल है। कार्टूनिस्ट का कहना था कि यह बच्चा तभी बड़ा होना शुरू होगा, जब वह अपनी मातृभूमि (फिलिस्तीन) वापस लौटेगा।
पीठ किए हुए और चेहरा छिपा हुआ: 1973 के बाद से हंडाला को हमेशा अपनी पीठ किए हुए दर्शाया जाने लगा। वह दुनिया को अपना चेहरा नहीं दिखाता। यह दुनिया की उदासीनता के खिलाफ एक मौन विरोध है। वह अपना चेहरा तभी दिखाएगा जब उसकी जमीन आजाद होगी।
पीछे बंधे हाथ: हंडाला ने अपने हाथ पीठ के पीछे बांधे हुए हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि वह बाहरी दुनिया (खासकर अमेरिका और पश्चिमी देशों) द्वारा थोपे गए समाधानों को सिरे से खारिज करता है।
फटे कपड़े और नंगे पैर: यह गरीब और मजलूम शरणार्थियों की असल जिंदगी और उनके दर्द को दर्शाता है।
ईरानी हैकर्स ने यह नाम क्यों चुना?
ईरान-समर्थित हैकर ग्रुप ने यह नाम इजरायल और अमेरिका की नीतियों का साइबर दुनिया में विरोध करने के लिए चुना है। यह फिलिस्तीन के प्रति उनके वैचारिक समर्थन का हिस्सा है। यही कारण है कि जब भी यह ग्रुप अमेरिका या इजरायल के किसी सिस्टम को हैक करता है, तो स्क्रीन पर अपना संदेश और इसी ‘हंडाला’ (फटे कपड़ों वाले बच्चे) की तस्वीर छोड़ जाता है।
ट्रंप प्रशासन के लिए यह इसलिए भी बड़ी चुनौती है क्योंकि यह सिर्फ एक डेटा चोरी नहीं, बल्कि एक वैचारिक युद्ध (Ideological War) है, जिसे इंटरनेट के माध्यम से लड़ा जा रहा है।

