आजकल हार्ट की समस्याएं काफी आम हो गई हैं। खासकर भारत में युवाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके पीछे आधुनिक जीवनशैली बड़ी जिम्मेदार है। ज्यादा जंक फूड खाना, तनाव, नींद की कमी और शारीरिक गतिविधियों की कमी हार्ट पर बोझ डाल रही हैं। इसलिए सिर्फ जीवनशैली सुधारना ही काफी नहीं है, बल्कि यह जानना भी जरूरी है कि अगर अचानक हार्ट अटैक आए तो तुरंत क्या करना चाहिए। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है और इसमें कुछ सेकेंड भी बहुत मायने रखते हैं।
हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है। आम तौर पर सीने में दबाव या तेज दर्द महसूस होता है, जो बाएं हाथ, जबड़े या कमर तक फैल सकता है। सांस लेने में तकलीफ, ठंडा पसीना, जी मिचलाना, चक्कर आना और अचानक बेचैनी या घबराहट महसूस होना भी इसके संकेत हो सकते हैं।
आआपातकालीन नंबर 108 या किसी लोकल इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें और अपने लक्षण विस्तार से बताएं। कॉल तब तक रखें जब तक हेल्पलाइन से स्पष्ट निर्देश न मिल जाए।
इस दौरान अगर फर्स्ट एड बॉक्स में एस्पिरिन मौजूद हो तो एक गोली चबाकर निगल लेना चाहिए, क्योंकि यह ब्लड क्लॉटिंग को रोकने में मदद करता है। आराम से सुरक्षित स्थिति में बैठें या लेट जाएँ। अगर चक्कर या बेहोशी जैसी स्थिति हो रही हो तो घुटने हल्के मोड़कर करवट ले कर लेटना बेहतर होता है। कोशिश करें कि ज्यादा चलने-फिरने या सीढ़ियां चढ़ने-उतरने से बचें।
इतना ही नहीं, किसी भरोसेमंद व्यक्ति को तुरंत सूचित करें। परिवार, दोस्त या पड़ोसी मेडिकल हेल्प आने तक आपकी मदद कर सकते हैं। साथ ही अपने घर का दरवाजा खुला रखना चाहिए, ताकि मेडिकल टीम जल्दी से जल्दी पहुंच सके। इस पूरे समय में शांत रहने की कोशिश करें क्योंकि पैनिक होने से हार्ट पर दबाव बढ़ सकता है। धीरे-धीरे गहरी सांस लें और खुद को संयमित रखें।
हार्ट अटैक के दौरान कई मिथक भी फैलते हैं, जैसे जोर-जोर से खांसने या पानी पीने से फायदा हो जाएगा। डॉक्टरों के अनुसार ये सब वैज्ञानिक तौर पर सही नहीं हैं। इस दौरान कीमती समय बचाना सबसे जरूरी है, इसलिए बेकार की चीजों में समय न खोएँ।
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लें।
